Modi Govt. fails to stem prices, gram breaks records

नई दिल्ली. महंगाई रोकने के लिए केंद्र के तमाम प्रयास पस्त होते दिख रहे हैं। चना ने कीमतों को लेकर नया रिकॉर्ड बनाया। आलू और शक्कर की कीमतों भी दोगुनी हुई हैं। शुक्रवार को दिल्ली में देशी चना के थोक भाव 71 से 71.5 रुपए किलो पर पहुंच गए, जबकि पिछले साल चना 48 से 52 रुपए किलो से बिका था। इस साल कीमतें पिछले साल की तुलना में 35% तक ज्यादा हुई हैं। क्या वजहें हैं कीमत बढ़ने की…

– चने की कीमतों में इजाफा की कई वजह हैं। जैसे चने की कम पैदावार, वायदा बाजार में ऊंचा भाव और ऑस्ट्रेलिया से इम्पोर्ट में कमी बताई जा रही है।

– एग्रीकल्चर मिनिस्ट्री के मुताबिक, इस साल चने की पैदावार करीब 21% घटी है।

– चना ही नहीं, दालें भी कन्ज्यूमर को 10 से 35% तक महंगी मिल रही हैं।

आलू और शक्कर की कीमते भी बढ़ीं

– उधर, सब्जियों में आलू की कीमतें भी चौंका रही हैं। तीन महीनों में दाम दोगुने होकर 20 रुपए तक पहुंच चुके हैं।

– शक्कर भी पिछले साल की तुलना में 50% से अधिक महंगी बिक रही है।

– भावों में तेजी की वजह अगले साल कम प्रोडक्शन का अनुमान और चीनी मिलों की बढ़ती लागत है।

– कम प्रोडक्शन की वजह से ही गेहूं भी कन्ज्यूमर को तीन से छह रुपए किलो तक महंगा मिल रहा है।

जानकार क्या कहते हैं?

-बाजार में बढ़े भाव के बारे में एग्रीकल्चर एक्सपर्ट देवेंद्र शर्मा कहते हैं – “पिछले दो साल से सूखा है।”

– “ऐसे में प्रोडक्शन तो थोड़ा घटा है, लेकिन इससे कारोबारियोंं को दाम बढ़ाने का बहाना मिल गया है। चना फ्यूचर ट्रेडिंग में है, इसलिए भी उसके दामों में बढ़ोत्तरी हो रही है।”

– वहीं, एग्रीकल्चर मिनिस्ट्री के अनुमान के अनुसार देश में चना 95 लाख टन के लक्ष्य के मुकाबले 74.8 लाख टन रह सकता है।

– भविष्य में भी चने के थोक भाव लगातार 55 रुपए या इसके आसपास रहने की उम्मीद की जा रही है।

– कारोबारी दिलीप खंडेलवाल ने बताया कि सरकारी अनुमान के मुताबिक, – ” चना लक्ष्य से सिर्फ 20 फीसदी ही कम पैदा हुआ है, लेकिन हकीकत यह है कि पिछले तीन महीनों से मंडियाें में चना बीते वर्ष के मुकाबले 50% से अधिक नहीं आ पाया है।”

– “अगर सरकार कह रही है कि प्रोडक्शन अधिक है तो चना बाजार में क्यों नहीं आ रहा है, जबकि स्टॉकिस्टों पर सरकारी की सख्ती है।”

– ” वहीं दाल उद्योग महासंघ के सुरेश अग्रवाल ने कहा कि बीते वर्ष के मुकाबले इस समय सभी तरह की दालों की कीमतें 10 से 35 फीसदी तक ऊंची हैं। चने की कीमतें इससे अधिक पहले कभी नहीं बढ़ीं।

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