Hindi main bhi Zakir Naik ki dhajjiyan

barelvi wahabi*जाकिर नाइक के बारे चंद अहम जानकारी*
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ज़ाकिर नाइक जो पहले जानवरों का डॉक्टर था जब उसकी डाॅक्टरी नहीं चली तो उसने तब्लीगे दीन के नाम पर अपना नया धंधा खोलकर करोड़ों और अरबों का ऐसा साम्राज्य खड़ा किया के उसके प्रोग्राम के स्टेज की कीमत ही करोड़ों में होती है लेकिन कभी किसी ने जानने की कोशिश नहीं की के यह पैसा आ कहां से रहा है? कौन दे रहा है और किसलिये दे रहा है? इसके पीछे मिशन क्या है? मगर अफसोस सीधा सादा मुसलमान उसकी चमक दमक और हिफ्ज की गई चंद आयतों और अंग्रेजी बोलने के अंदाज से उसे दीन का जानकार समझकर गुमराह हो रहा है ।
आज चारों तरफ ज़ाकिर नाइक का मामला गर्माया हुआ है जाकिर नाइक के अंधे भक्त आज इत्तेहाद का राग अलाप रहे हैं लेकिन इन अंध भक्तों से कोई पूछे कि

आज इत्तेहाद का राग अलापने वाले उस वक्त कहाँ गये थे जब जाकिर नाइक अपनी तकरीरों में एक खुदा की इबादत करने वाले और वलियों से मुहब्बत करने वाले और उनके मजारात पर हाजिरी देने वाले करोड़ों सुन्नियों को निशाना बना कर उन्हें मुशरिक और कब्र को पूजने वाला बता रहा था।
इत्तेहाद का राग अलापने वाले उस वक्त कहां थे जब जाकिर नाइक ने खुले आम TV पर कहा कि मुहम्मद(सल्लल्लाहु अलयहि वसल्लम ) को मानना हमारे लिये हराम है (मआज़अल्लाह) फिर यह कज़्ज़ाब अपनी बात से मुकर गया था कि मैंने ऐसा नहीं कहा ।

इत्तेहाद का राग अलापने वाले उस वक्त कहां थे जब ज़ाकिर नाइक दीने हक़ की राह में अपने सारे घराने को कुर्बान करने वाले शहीदे आज़म इमामे हुसैन (रदियल्लाहु तआला अन्हु ) की हक़ो-बातिल की लड़ाई को *राजनीतिक लड़ाई* बता रहा था और उसकी महफिलों में बैठे यज़ीद के चाहने वाले तालियाँ बजा रहे थे।

इत्तेहाद का राग अलापने वाले उस वक्त कहां थे जब ज़ाकिर नाइक ने इमामे हुसैन (रदियल्लाहु तआला अन्हु ) पर तीन दिन पानी बंद करने,औलादे रसूल को भूखा प्यासा कत्ल करवाने वाले यज़ीद को जन्नत की बशारत सुना कर करोड़ों मुसलमानों के दिल को तकलीफ पहुंचाई थी। और आज इत्तेहाद का राग अलापने वाले उस वक्त वाहवाही कर रहे थे।

नबी करीम (अलयहिस्सलाम ) शोहदा-ऐ- बद्र व उहुद के मज़ार पर तशरीफ ले जाते, सहाबा और सहाबियात व अहले बैते अत्हार मुस्तफा जाने रहमत की मज़ारे पुर अन्वार की जियारत को जाते लेकिन इत्तेहाद का राग अलापने वाले उस वक्त कहां थे जब यही ज़ाकिर नालायक अपनी महफिलों में कहता कि हमारे बाप दादा मंदिर जाते थे इसलिए हम मज़ार पे जाते हैं (मआज़अल्लाह ) और मजार पर जाना मंदिर पे जाने की तरह बताता था।और उसकी महफिलों में बैठने वाले यहूदियों के ऐजेन्ट तालियाँ बजाते थे।
सदियों से मुसलमान चारों इमामों की तक़लीद कर इबादतों से लज़्ज़त हासिल कर रहे थे लेकिन कभी उनमें कोई लड़ाई झगड़ा नहीं हुआ लेकिन इत्तेहाद का राग अलापने वाले उस वक्त कहां थे जब जाकिर नाइक जैसा जानवरों का डाॅक्टर यह कह रहा था कि इमामों की तक़लीद ने कौम को नुकसान पहुँचाया है ( मआज़अल्लाह ) जबकि हकीकत तो यह है कि मुसलमानों को नुकसान ज़ाकिर नाइक जैसे यहूदियों के ऐजेन्ट जिन्हें पैसा देकर मुसलमानों में फूट डालने और नऐ-नऐ फिर्कों को बनाने के लिये पैदा किया गया है की वजह से हुआ है।

ज़ाकिर नाइक को बचाने के लिऐ रैलियां और जुलूस निकालने वाले और इत्तेहाद का राग अलापने वालों का इत्तेहाद उस वक्त कहां था जब ज़ाकिर नाइक अपने नबी की मुहब्बत और ताज़ीम और अज़्मत के इज़्हार के लिये ईदमीलादुन्नबी का जुलूस निकालने वाले सुन्नियों पर बिदअती और मुशरिक होने का फतवा लगाकर उन्हें जहन्नमी बता रहा था और यही इत्तेहाद का दिखावा करने वाले उसे मना करने की बजाय बहुत खुश हो रहे थे ।
ज़ाकिर नाइक को बचाने के लिए (जबकि पुलिस ने अभी उसको कुछ नहीं किया) हर आम मुसलमान से मदद की गुहार लगाने वाले यह इत्तेहाद के ठेकेदार उस वक्त कहाँ थे जब यही ज़ाकिर नाइक अल्लाह के रसूल ( अलयहिस्सलाम ) और उसके वलियों से मदद मांगने वालों को मुशरिक बता रहा था ।
शफाअत और वसीले को एक ही चीज़ बताकर और इनके इसके नाजायज़ होने पर कुरान की पच्चीस आयतों का झूठा हवाला देकर मुसलमानों को गुमराह करने वाला यह जानवरों का डाॅक्टर मुसलमानों में तफरका पैदा कर रहा था तब यह इत्तेहाद के ठेकेदार कहां थे ।
*नोट:-कम पढ़े -लिखे लोगों और दीन की जानकारी नहीं रखने वाले लोगों को अपनी अंग्रेजी और चन्द रटी हुई आयतों से धोखा देने वाला और औलेमा-ऐ- अहले सुन्नत के सामने आने से कतराने वाला ज़ाकिर नाइक जिसे औलेमा-ऐ-अहले सुन्नत ने श्रीलंका मे घेरकर शफाअत और वसीले के एक ही चीज होने और इसके नाजायज़ और हराम होने पर कुरान में पच्चीस आयतों का हवाला पूछा तो इसकी सिट्टी-पिट्टी गुम हो गई थी और आज तक यह उसका जवाब नहीं दे पाया जिसकी वीडियो नेट पर मौजूद है ।*barelvi wahabi

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