Sarma learnt Sanskrit at 80, releases translation of book at age 100

sarma /Texas, America resident 80 years old Ramalingam Sarma of India origin has achieved a great geat at the age of 100. He wanted to translate Sunder Kand in English. For this he started learning Sanskrit at the age of 80 and typing at the age of 88. After this, he started writing in Sanskrit for 12 years and has releases translation of book at the age 100.

Ramalingam, a Tamil retired after service of 35 years in Hindustan Aeronautics, Bengaluru and is now settled in a village in Texas.

Sunder Kand’s English translatin has been published in two volumes each containing 650 pages.

मुंबई/पुणे. शरीर बूढ़ा हो सकता है, लेकिन इच्छाशक्ति कभी नहीं। यह बात अमेरिका में टेक्सास के क्रिस्को गांव में रह रहे एक भारतीय रामलिंगम सरमा ने सच साबित कर दी। 12 साल से जारी अंग्रेजी में सुंदरकांड के अनुवाद का काम इन्होंने अपने 100वें जन्मदिन पर पूरा कर दिया। वे अपने जीते जी सुंदरकांड का ज्ञान अंग्रेजी में लोगों के सामने लाना चाहते थे। खुद से किए वादे को उन्होंने प्रेरणा बनाया और ऐसा कर भी दिखाया। तमिल भाषा में सुंदरकांड पढ़ा तब मिली प्रेरणा...

– रामलिंगम के मुताबिक, ”बचपन में दादा और मां सुंदरकांड का पाठ किया करते थे। तब पाठ का अर्थ समझ नहीं आता था, लेकिन सुनने में मीठा लगता था।”

– ”कॉलेज खत्म कर मैंने बेंगलुरु में हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स ज्वाॅइन कर लिया। सुंदरकांड के वे पाठ पीछे छूट गए।”

– ”32 साल नौकरी करने में गुजर गए। मुझे 35 साल की उम्र में तमिल भाषा में सुंदरकांड पढ़ने का मौका मिला। उसने मुझे काफी प्रभावित किया।”

– ”हजारों साल पहले संस्कृत में रचे गए इस ग्रंथ को पढ़ने की ठानी। लेकिन उस समय न मुझे संस्कृत आती थी और न ही सीखने का समय मिला, इसलिए उस वक्त संस्कृत में सुंदरकांड नहीं पढ़ पाया।”

– रामलिंगम किताब को बेचेंगे नहीं, बल्कि लाइब्रेरीज, संस्कृत के रिसर्चर्स को गिफ्ट करेंगे।

– उन्होंने फोन पर भास्करको बताया कि कैसे बिना किसी की मदद के 65 साल पहले जो करने की सोची थी, उसे उम्र के अंतिम पड़ाव में पूरा दिखाया।

इंटरनेट से संस्कृत सीखी फिर टाइपिंग

– रामलिंगम के रिटायर होने के बाद भी कई साल ट्रेनिंग, अन्य प्रोजेक्ट को पूरा करने में गुजर गए। वे भारत में पत्नी शकुंतला के साथ रहते थे, लेकिन उसके निधन के बाद बेटे ने अमेरिका बुला लिया तो वहां जा बसे।

– अभी टेक्सास प्रांत के क्रिस्को गांव में रहते है। 80 साल के थे, जब एक दिन घर में बैठे-बैठे बचपन के दिन में खो गया। तभी दादा और मां के सुनाए हुए सुंदरकांड के पाठ याद आ गए।

– याद अाया कि संस्कृत में सुंदरकांड पढ़ने की ठानी थी। उस दिन महसूस हुआ कि साधारण जीवन बिताने से अच्छा है, वह अधूरा काम किया जाए, जो 65 साल पहले सोचा था।

– शुरुआत संस्कृत सीखने से की। टेक्सास में जब संस्कृत सिखाने वाला कोई नहीं मिला तो खुद ही इंटरनेट की मदद से सीख ली।

– संस्कृत सीखने और सुंदरकांड पढ़ने-समझने में 8 साल गुजर गए। लगा कि इसका अध्ययन समाज के लिए भी जरूरी है तो अंग्रेजी में अनुवाद करने की सोच ली।

– 88 साल की उम्र में टाइपिंग स्कूल में एडमिशन ले लिया। अपने स्कूल का सबसे बूढ़ा विद्यार्थी था मैं। कभी बेटा, तो कभी पोता स्कूल छोड़ने जाता था।

इस तरह मनाया जन्मदिन

– रामलिंगम ने बताया कि 2 दिन स्कूल और 5 दिन घर में प्रैक्टिस करता था। थोड़ी स्पीड आई तो अनुवाद शुरू किया। 12 साल तक अनुवाद करता रहा। इसी साल 6 फरवरी को मैं 100 साल का हो गया और अपनी इस पुस्तक का विमोचन कर जन्मदिन मनाया।

– इस उम्र में अब भी रामलिंगम आईपैड पर जोड़ी गई स्क्रीन की मदद से चार घंटे पढ़ाई करते हैं। कहते हैं कि आज की भागमभाग जिंदगी में नई पीढ़ी उलझती ही जा रही है। वे अपने पुराणों-ग्रंथों से दूर होते जा रहे हैं। मैं चाहता हूं वे इसे पढ़ें, अभ्यास करें, और जीवन में आदर्श स्थापित करने के गुर सीखें।

– सुंदरकांड का अंग्रेजी में अनुवाद दो खंडों में प्रकाशित किया गया है। हर खंड में 650 पेज हैं। किताब में श्लोक संस्कृत और रोमन दोनों में लिखे गए हैं, महत्वपूर्ण शब्दों का अंग्रेजी में अर्थ और अंत में श्लोक का अंग्रेजी में अर्थ लिखा गया है।

   ممبئی / پونے. جسم بوڑھا ہو سکتا ہے، لیکن قوت ارادی کبھی نہیں. یہ بات امریکہ میں ٹیکساس کے كرسكو گاؤں میں رہ رہے ایک ہندوستانی راملگم سرما نے سچ ثابت کر دی. 12 سال سے جاری انگریزی میں سدركاڈ کے ترجمہ کا کام انہوں نے اپنے 100 ویں سالگرہ پر مکمل کر دیا. وہ اپنے جیتے جی سدركاڈ کا علم انگریزی میں لوگوں کے سامنے لانا چاہتے تھے. خود سے کئے وعدے کو انہوں نے پریرتا بنایا اور ایسا کر بھی دکھایا. تمل زبان میں سدركاڈ پڑھا تب ملی پریرتا …

– راملگم کے مطابق، ” بچپن میں دادا اور ماں سدركاڈ کا متن کیا کرتے تھے. تب متن کا مطلب سمجھ نہیں آتا تھا، لیکن سننے میں میٹھا لگتا تھا. ”

– ” کالج ختم کر میں نے بنگلور میں ہندوستان یئروناٹکس جوان کر لیا. سدركاڈ کے وہ ٹیکسٹ پیچھے چھوٹ گئے. ”

– ”32 سال نوکری کرنے میں گزر گئے. مجھے 35 سال کی عمر میں تامل زبان میں سدركاڈ پڑھنے کا موقع ملا. اس نے مجھے کافی متاثر کیا. ”

– ” ہزاروں سال پہلے سنسکرت میں رچے گئے اس گرنتھ کو پڑھنے کی ٹھانی. لیکن اس وقت نہ مجھے سنسکرت آتی تھی اور نہ ہی سیکھنے کا وقت مل گیا، تو اس وقت سنسکرت میں سدركاڈ نہیں پڑھ پایا. ”

– راملگم کتاب کو فروخت کرے گا نہیں، بلکہ لابرےريج، سنسکرت کے رسرچرس کو گفٹ کریں گے.

– انہوں نے فون پر بھاسكركو بتایا کہ کس طرح بغیر کسی کی مدد کے 65 سال پہلے جو کرنے کی سوچی تھی، اسے عمر کے آخری پڑاؤ میں مکمل دکھایا.

انٹرنیٹ سے سنسکرت سیکھی پھر ٹائپنگ

– راملگم کے ریٹائر ہونے کے بعد بھی کئی سال ٹریننگ، دیگر پروجیکٹ کو مکمل کرنے میں گزر گئے. وہ بھارت میں بیوی شکنتلا کے ساتھ رہتے تھے، لیکن اس کے انتقال کے بعد بیٹے نے امریکہ بلا لیا تو وہاں جا بسے.

– اب ٹیکساس صوبے کے كرسكو گاؤں میں رہتے ہیں. 80 سال کے تھے، جب ایک دن گھر میں بیٹھے بیٹھے بچپن کے دن میں کھو گیا. تبھی دادا اور ماں کے سنائے ہوئے سدركاڈ متن یاد آ گئے.

– یاد اايا کہ سنسکرت میں سدركاڈ پڑھنے کی ٹھانی تھی. اس دن محسوس ہوا کہ عام زندگی گزارنے سے بہتر ہے، وہ نامکمل کام کیا جائے جو 65 سال پہلے سوچا تھا.

– شروع سنسکرت سیکھنے سے کی. ٹیکساس میں جب سنسکرت سکھانے والا کوئی نہیں ملا تو خود ہی انٹرنیٹ کی مدد سے سیکھ لی.

– سنسکرت سیکھنے اور سدركاڈ پڑھنے سمجھنے میں 8 سال گزر گئے. لگا کہ اس کا مطالعہ معاشرے کے لئے بھی ضروری ہے تو انگریزی میں ترجمہ کرنے کی سوچ لی.

– 88 سال کی عمر میں ٹائپنگ اسکول میں داخلہ لے لیا. اپنے اسکول کی سب سے بوڑھا طالب علم تھا مجھے. کبھی بیٹا، تو کبھی پوتا اسکول چھوڑنے جاتا تھا.

اس طرح منایا سالگرہ

– راملگم نے بتایا کہ 2 دن اسکول اور 5 دن گھر میں پریکٹس کرتا تھا. تھوڑی سپیڈ آئی تو ترجمہ شروع کیا. 12 سال تک ترجمہ کرتا رہا. اسی سال 6 فروری کو میں 100 سال کا ہو گیا اور اپنی اس کتاب جاری کر سالگرہ منائی.

– اس عمر میں اب بھی راملگم رکن پر جوڑی گئی سکرین کی مدد سے چار گھنٹے پڑھائی کرتے ہیں. کہتے ہیں کہ آج کی بھاگمبھاگ زندگی میں نئی نسل الجھتے چلے ہی جا رہی ہے. وہ اپنے پرانوں-نصوص سے دور ہوتے جا رہے ہیں. میں چاہتا ہوں وہ اسے پڑھیں، مشق، اور زندگی میں کامل کرنے کے لئے ترکیبیں سیکھیں.

– سدركاڈ کا انگریزی میں ترجمہ دو جلدوں میں شائع کیا گیا ہے. ہر سیکشن میں 650 صفحات ہیں. کتاب میں آیات سنسکرت اور رومن دونوں میں لکھے گئے ہیں، اہم الفاظ کا انگریزی میں معنی اور آخر میں آیات کا انگریزی میں معنی لکھا گیا ہے.

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