Cursed fort destroyed by lightning every year, people fear to enter

Below are the photo of the ruined fort of the king Jagatpal Singh which is 20 km North of Ranchi city. This area was known to center of the business trade some 500 to 200 years back. Jagatpal Singh was given the title of Raja Bahadur from the British rulers in India. Fort is believed to be some 200 to 250 years old. According to local people lightning strikes every year on this fort and has gradually destroyed it.

pithoria-fortJagatpal Singh had helped in the arrest and execution of many freedom fighters during British regime. After this, lightning started striking the fort every year making it a ghost fort.

Now why was this building cursed, some quick research gave me a vague idea about its origin, with no direct document as evidence it was time to stich different sources to create the following story.

The story goes like this, King Jaimangal Singh and his son King Jagatpal Singhestablished Pithoria as a local trading hub. This place under their rule became an important cultural hub of the Chotanagpur region. Notably King Jagatpal Singh was very popular and was very much loved by his subjects. It was also known that he in turn kept good care of the residence of his kingdom. He was also instrumental in lot of developmental work which established him and his kingdom known far and wide.

The British rulers in India were already having well established links in Chotanagpur area and the rise of popularity of the king of Pithoria signalled them to start showing interest in this locality also. This was a new territory which was not under their rule and they were desperate to bring this region under their influence.

During the 1830’s The Great Rebellion had already started in the plateaus of Chotanagpur and the British Forces were continuously fighting the different tribal groups under the command of Captain Wilkinson. King Jagatpal Singh decided to side with theEast India Company and not with the rebelling tribals. This however did not go down well with the local population and in peoples eye he was being seen as a traitor to his motherland.

रांची/झारखंड. आजादी की लड़ाई में झारखंड के कई देशभक्त शहीद हुए थे। अंग्रेजों को यहां के आदिवासियों ने कई जगहों से पीछे हटने को मजबूर कर दिया था। लेकिन, यहां के पिठोरिया सियासत के राजा जगतपाल ने अंग्रेजों की मदद की थी। जगतपाल ने यहां के क्रांतिकारी ठाकुर विश्वनाथ शाहदेव को पकड़वाने में मदद की थी। इसके बाद जगतपाल को ऐसा श्राप मिला कि उनका पूरा वंश खत्म हो गया। यही नहीं, हर साल बिजली गिरने से उनका किला पूरी तरह से बर्बाद हो गया है। किले की ओर जाने से डरते हैं लोग...

– रांची से 20 किमी की दूरी पर पिठोरिया सियासत था। इसपर नागवंशी राजाओं का शासन था।
– 1831-32 में पूरे इलाके में अंग्रजों के खिलाफ आदिवासियों ने युद्ध छेड़ रखा था। अंग्रेज इन इलाकों से पीछे हटने को मजबूर हो रहे थे।
– आदिवासियों के इस कोल विद्रोह को दबाने के लिए अंग्रेज अधिकारी विल्किंग्सन ने राजा जगतपाल की मदद ली थी।
– जगतपाल उस समय पिठोरिया सियासत का राजा था। लालच में आकर उसने अंग्रेजों की मदद कर दी।
– ठाकुर विश्वनाथ शाहदेव के नेतृत्व में आदिवासी अंग्रेजों के खिलाफ लड़ाई लड़ रहे थें। जगतपाल ने धोखे से शाहदेव को अंग्रेजों के हवाले कर दिया ।
– अंग्रेजों ने क्रांतिकारी शाहदेव को फांसी दे दी। लेकिन, इससे पहले उन्होंने जगतपाल के पूरे वंश को खत्म होने का श्राप दे दिया।
– लोगों की मान्यता है कि इसके बाद धीरे-धीरे कर राजा जगतपाल के सभी संतानों की मौत हो गई। साथ ही, हर साल उनके किले पर बिजली गिरने लगी।
– किले की ओर जाने से अब लोग डरने लगे हैं। उनका मानना है कि इसके आस-पास बुरी आत्माएं रहती है।
– हर साल बिजली गिरने से राजा जगतपाल का पूरा किला खंडहर में बदल गया है।

क्या थी किले की खासियत

– झारखंड के ऐतिहासिक किलों में राजा जगतपाल के किले की गिनती होती थी। पूरे किले में करीब 100 कमरे हैं।
– यह किला पूरी तरह से पत्थरों से बना हुआ है। चुने के जरिए पत्थरों को इसमें जोड़ा गया था।
– इसके अन्दर न केवल रानियों के लिए तालाब बने थे बल्कि उनकी पूजा के लिए शिव मंदिर भी बने थे।
– राजा जगतपाल के किले की डिजाइन मुगलशैली पर आधारित थी। लेकिन, अब किले के अधिकांश भाग बर्बाद हो चुके हैं।
– दिन में भी इस किले के अंदर अब लोग नहीं जाते हैं। किले के चारों ओर घनघोर जंगल फैला है।

वैज्ञानिक बताते है कुछ और वजहें

– वैज्ञानिक के मुताबिक यहां मौजूद ऊंचे पेड़ और पहाड़ो में मौजूद लोह अयस्को की वजह से यहां बिजली गिरती है।
– लेकिन लोगों, का कहना है कि ऐसा क्रांतिकारी शाहदेव की फांसी के पहले नहीं होता था।
– उनका मानना है कि यह किला दशको तक आबाद रहा है। तब, क्यों नहीं बिजलियां गिरती थी।
– स्थानीय लोग वैज्ञानिकों के तर्क को पूरी तरह से खारिज कर देते हैं।

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