Nationary archery player jumps from 150 feet height to commit suicide

playerNational archery player Neha tried to commit suicide by jumping in dam from 150 feet height to commit suicide. However, a brave CISF jawan saved her. She is in coma in hospital.
Neha had urged her father to arrange Rs. 2.5 lakh to purchase bow and arrows for archer. Father is a poor man. He filed to arrange the money. Crossed over it, Neha attempted suicide.
The case show how poor is the condition of most of sports in India where talented players are not provided facilities for practice and equipments.
रांची/धनबाद.झारखंड के धनबाद में नेशनल तीरंदाज नेहा ने सुसाइड करने की कोशिश की। वो 150 फीट की ऊंचाई से यहां के मैथन डैम में छलांग लगा दी। हालांकि, एक CISF जवान ने डैम में कूदकर उसकी जान बचा ली। 11 मिनट तक CISF जवान डैम में नेहा की जिंदगी बचाने की कोशिश करता रहा। बता दें कि नेशनल प्लेयर नेहा ने पिता से नाराज होकर सुसाइड की कोशिश की है। 2.50 लाख की धनुष खरीदने से किया था इनकार…
– बता दें कि नेहा ने पिता से 2.50 लाख रुपए की धनुष खरीदने की मांग की थी।
– लेकिन, गरीबी की वजह से पिता ने धनुष खरीदने से इनकार कर दिया था।
– पिता की बातों से नाराज होकर वो स्कूल जाने के बहाने घर से निकल गई।
– बस से वो स्कूल के पास तो पहुंची। लेकिन, कैंपस के अंदर नहीं गई। नेहा मैथन डैम के पास पहुंच गई।
– इसके बाद उसने करीब 150 फीट की ऊंचाई से डैम में छलांग दी।
– बता दें कि नेहा धनबाद के पास की केंद्रीय विद्यालय में 10 वीं की स्टूडेंट है।
ऐसे बचाई गई जान
– नेहा को बचाने वाले CISF जवान राजा ने बताया कि सुबह के 7:30 बजे डैम के 1 नंबर गेट पर ड्यूटी लगी थी।
– मैंने स्कूल ड्रेस में एक छात्रा को 1 नंबर गेट की ओर आते देखा। वह मुझसे करीब 200 कदमों की दूरी पर आकर खड़ी थी।
– वह कभी बैठती, तो कभी खड़ी हो जाती। मुझे वह परेशान दिखी। कुछ देर बाद उसने अपने कंधे से स्कूल बैग निकाल कर जमीन पर रख दिया।
– कुछ पल बाद मैंने देखा कि वह डैम की गहराई जानने की कोशिश कर रही है। वह एकटक डैम के नीचे देख रही थी।
– मुझे लगा कि वह डैम की सुंदरता निहार रही है। पर कुछ ही पल में स्थिति बदल गई। उसने अपनी आंखें बंद की और डैम में छलांग लगा दी।
– मैं चीख पड़ा…। उसकी तरफ दौड़ा…। पर वह डैम के नीचे गिर चुकी थी। मैंने भी उसे बचाने के लिए छलांग लगा दी।
– 15 सेकेंड के अंतराल पर हम दोनों डैम में गिरे। मेरी मदद को शशिकांत गुप्ता नाम का एक युवक भी कूदा। उसे बचाने के लिए अब हम दो लोग पानी में थे…।
– लेकिन, पानी से भरे डैम में छात्रा को बचाना आसान नहीं था। यहां खुद को भी डूबने से बचाना था और उसे भी बाहर निकालना था।
– नेहा बार-बार हाथ छुड़ाती और हम बार-बार उसका हाथ पकड़ लेते। हम उसे बाहर की ओर खींचते और पानी की धार उसे अंदर की ओर ले जाने का बल लगाती।
– 8 से 10 मिनट तक पानी से जिंदगी बचाने की जंग लड़ते रहे। अंतत: हमारी मेहनत रंग लाई। छात्रा की जिंदगी अब हमारे हाथों में सुरक्षित थी।
आई-कार्ड से हुई पहचान
– छात्रा की पहचान उसके स्कूली बैग में रखे आई-कार्ड से हुई।
– आई-कार्ड से पता चला कि उसका नाम नेहा है और वह वह केंद्रीय विद्यालय मैथन की छात्रा है।
– आई-कार्ड की मदद से लोगों ने घटना की जानकारी स्कूल प्रबंधन और छात्रा के पिता विश्वनाथ प्रसाद को दी।
– नेहा तीरंदाजी में स्कूल को भी रिप्रेजेंट कर रही है। वो 18 सितंबर को हैदराबाद में संपन्न हुई तीरंदाजी में भी हिस्सा लेकर 24 सितंबर को धनबाद लौटी थी।
बेटी को उठाती रही मां
– बीपी नियोगी अस्पताल में नेहा बेहोश पड़ी थी। मां उसे उठाने की कोशिश करती।
– मां अपनी बेटी की शांत शरीर को हिलाती और फिर रो पड़ती।
– नेहा की मां उसे धनुष खरीद लेने की बात कहकर उसे उठाती रही।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *