Daughter caught in between two fathers in court room drama

daughterA daughter was caught in between two fathers in court room drama at Khandwa in Madhya Pradesh. Zafar Khan had given his 2 months old daughter for adoption to his childless friend Saleem Khan. However, when daughter Jannat turned 17, Zafar laid claim on the daughter and moved court for her custody.

Litigation continued for 3 years after which court asked the girl as to with whom she wants to live. Jannat decided that she would live with the foster parents since she regards them as the real parents. She chided his physical father for abandoning her when she was 2 months old.

मध्यप्रदेश के खरगोन जिले में शनिवार को लगी नेशनल लोक अदालत में इस अनोखे मामले पर सुनवाई हुई। जिसमें बेऔलाद दोस्त को बेटी गोद देने वाले दोस्त ने 16 साल बाद अचानक उसपर दावा कर दिया। तीन साल तक चले मामले में शनिवार को फैसला हुआ जब दोनों पार्टियां कोर्ट में आमने-सामने आ गईं। मामले में अाखिरकार कोर्ट ने लड़की से ही पूछा कि वह किसके साथ रहना चाहती है। जानिए क्या है पूरा मामला…

– सलीम खान और जफर खान (बदले हुए नाम) पक्के दोस्त थे। सलीम की शादी के पांच साल बाद भी उसकी कोई औलाद नहीं थी।

– छह बच्चों के पिता जफर ने दोस्ती का फर्ज निभाया और अपनी 20 दिन की बेटी जन्नत (बदला हुआ नाम) को 19 साल पहले सलीम की गोद में डाल दिया।

– सलीम के पक्ष का दावा था कि इसके लिए रजिस्टर्ड गोदनामा भी कराया गया था। जफर और उसकी पत्नी अक्सर बेटी से मिलने भी आते थे।

– तीन साल पहले अचानक जफर ने बेटी पर दावा किया और विवाद करने लगा। तब सलीम ने कोर्ट में केस दायर किया।

बेटी की आंखों में आंसू और कोर्ट का माहौल भावुक

– गोद दी हुई बेटी पर दावे के दौरान दोनों पार्टियों और लड़की के बीच खासी बहस हुई। मजदूरी करने वाले जफर ने कहा कि छह बच्चों में सबसे छोटी जन्नत गरीबी न देखे, इसलिए दोस्त को गोद दे दी थी।

– बेटी ने जन्म देने वाले पिता से सवाल किया कि 16 साल परवाह नहीं की और दूसरे को दे दिया तो अब क्यों हक जता रहे हो।

– यह कहते हुए बेटी की आंखों में आंसू आ गए और कोर्ट का माहौल भी कुछ देर के लिए भावुक हो गया।

– फैसला सुनाते हुए कोर्ट ने कहा कि देवकी ने कृष्ण को जन्म दिया और यशोदा ने पाला, बेटी पर भी दोनों का अधिकार है’।
– सीनीयर प्लीडर सीके पाठक ने कहा कि रजिस्टर्ड गोदनामा के बावजूद बालिग बेटे या बेटी पर निर्भर करता है कि वह जन्म देने वाले या पालने वाले पिता के साथ रहे। उसकी मर्जी मानी जाती है।

कोर्ट ने पूछा -वह किसके साथ रहना चाहती है

– सलीम ने भोपाल के एक परिवार में जन्नत की सगाई की थी। शादी से दो महीने पहले फैसला आने पर उसने राहत की सांस ली।

– कोर्ट ने जन्नत से पूछा कि वह किसके साथ रहना चाहती है। उसका जवाब था कि परवरिश करने वाले ही उसके असली मां-बाप हैं।

– कोर्ट ने पालने वाले मां-बाप के पक्ष में फैसला दिया। हालांकि यह भी कहाकि उसकी शादी में दोनों मां-बाप शामिल होंगे। शादी के बाद भी वह बेटी से मिल सकेंगे।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *