Only 5 persons can enter room where Jayalalithaa is kept, nurse cannot keep mobile

jayaStrict secrecy is being exercised about health of Tamil Nadu Chief Minister J. Jayalalithaa who has been moved again to ICU after suffering massive cardiac arrest in a Chennai hospital. Only 5 persons can enter room where Jayalalithaa is kept, nurse cannot keep mobile. If anyone of these persons tell anything about Amma’s health, they might by killed.

Meanwhile, Large number of AIADMK supporters thronged Apollo Hospitals here tonight following information that ailing chief minister and party supremo Jayalaithaa suffered a cardiac arrest after days of showing improvement.

Heavy police deployment has been made in and around the hospital where 68-year-old Jayalalithaa has been undergoing treatment since September 22.

As news about the setback in Jayalalithaa’s health spread, AIADMK workers, including a large number of women, started gathering at the hospital.

Police were seen controlling the stream of people to prevent any untoward incident even as they blocked the main road leading to the hospital.

Barricades have been set up in the vicinity of the hospital and police presence could be seen in arterial roads near the hospital.

Many women, who gathered near the main gate of the hospital, could be seen praying fervently for the well-being of their “Amma” (mother), as she is fondly known among her supporters.

“I only hope to hear a good news about Amma’s health. Right now, we are very tensed. I got the news about her heart attack one hour back and just arrived here,” an AIADMK cadre told PTI.

Some of the women held photographs of Jayalalithaa and raised slogans “Amma vaazhga, Puratchi thalaivi vaazhga!! (Long live Amma, Long live revolutionary leader).”

 

जयललिता के रूम में सिर्फ 5 लोगों को एंट्री की इजाजत: फोन भी नहीं रख सकतीं नर्स, डॉक्टर ने कहा था- कुछ कहा तो जान चली जाएगी

23 अक्टूबर तक 43 लोगों पर मुख्यमंत्री की तबियत को लेकर अफवाह फैलाने का आरोप में केस दर्ज हो चुका था। 8 तो गिरफ्तार भी किए गए थे।

चेन्नई.तमिलनाडु की सीएम जे. जयललिता को हॉस्पिटल में एडमिट हुए 4 दिसंबर को 73 दिन हो गए हैं। उनकी बीमारी को लेकर कई तरह के कयास लगते रहे हैं। इस दौरान सीक्रेसी और प्राइवेसी इस कदर रही है कि उनकी सेवा में लगीं नर्स फोन तक नहीं रख सकतीं। उनके कमरे में सिर्फ पांच लोगों को जाने की इजाजत है। वेंटीलेटर पर रहीं जया…..

– अक्टूबर के आखिर में खबर आई थी कि जया वेंटिलेटर पर हैं और उनकी सेहत दिन-ब-दिन खराब होती जा रही है। हालांकि, तब भी यही कहा जा रहा था कि वो ठीक हैं लेकिन शक इसलिए गहराता जा रहा था क्योंकि उनकी बीमारी के बारे में किसी को कुछ नहीं बताया जा रहा था।

– उस दौरान भास्कर जर्नलिस्ट उपमिता वाजपेयीने जब एक डॉक्टर से जया की सेहत पर बात करने की कोशिश की थी तो उसने चौंकाने वाला बयान दिया था। डॉक्टर ने कहा था- ‘मेरी जान और नौकरी दोनों खतरे में है। कोई बात नहीं कर पाऊंगा।’

कैसे हुईं थीं बीमार?

– 22 सितंबर की रात 9.45 बजे अचानक मुख्यमंत्री आवास पोएस गार्डन में पता चला कि जयललिता बेहोश हो गई हैं।

– सीएम हाउस से अपोलो हाॅस्पिटल के मालिक की बेटी और सीईओ प्रीथा रेड्‌डी के पास एक फोन आया। फौरन अपोलो से एम्बुलेंस रवाना हुई।

– ये नहीं बताया गया कि मरीज कौन है। अचानक एम्बुलेंस के ड्राइवर को कहा गया कि सीएम हाउस पहुंचो।

– 30 मिनट बाद जया बेहोशी की हालत में ग्रीम्स रोड के अपोलो हॉस्पिटल के आईसीयू में पहुंच चुकी थीं।

किस बात पर डॉक्टर ने कहा, नौकरी और जान को खतरा

– यहां जयललिता का इलाज कर रहे डॉक्टर्स या कोई कर्मचारी बात करने को तैयार नहीं है।

– अपोलो हॉस्पिटल के हर कर्मचारी का फोन इन दिनों इंटेलिजेंस एजेंसियों के सर्विलांस पर है।

– गोपनीयता ऐसी है कि जयललिता की मेडिकल फाइल अपोलो के सिस्टम से खोलने की कोशिश करते पाए गए 3-4 कर्मचारियों को नौकरी से निकाल दिया गया। और ये बात सिर्फ अपोलो की ही नहीं है।

– 23 अक्टूबर तक 43 लोगों पर मुख्यमंत्री की तबियत को लेकर अफवाह फैलाने का आरोप में केस दर्ज हो चुका था। 8 तो गिरफ्तार भी किए गए थे। हैरानी की बात ये भी है कि जया जिस रूम में भर्ती हैं, वहां जाने की इजाजत सिर्फ 5 लोगों को है।

– इनमें जया की नजदीकी शशिकला भी हैं, जो उनके घर में ही रहती थीं। इसके अलावा फैमिली डॉक्टर शिवकुमार, राज्यपाल और दो अन्य लोग हैं।

पीएम मोदी ने दिल्ली से भेजे थे तीन डॉक्टर

– जयललिता पहली बार अपोलो लाई गईं। इससे पहले तबीयत बिगड़ने या चेकअप कराने हर तीन-चार महीने में चेन्नई के ही श्रीरामचंद्र मेडिकल कॉलेज जाती रही हैं।

– ये बात किसी को बताई नहीं जाती थी। इस दिन भी उन्हें अपोलो नहीं लाया जाता। पर स्थिति नाजुक थी।

– अगले दिन 23 तारीख को पीएम मोदी ने दिल्ली एम्स के तीन डॉक्टरों को चेन्नई भेजा। इनमें कार्डियोलॉजिस्ट नितीश नाईक, पल्मोनोरोलॉजिस्ट जीसी खिलनानी और एनेस्थेसिस्ट अंजन त्रिखा थे।

– इसी बीच, जयललिता को माइनर हार्ट अटैक आया। उनकी शुगर काफी बढ़ी हुई थी और ब्लड प्रेशर बेकाबू था। उन्हें पेसमेकर लगाया गया। ये 24 से 27 तारीख के बीच की बात है।

– 28 से उनकी हालत और खराब होने लगी। मल्टी ऑर्गन प्रॉब्लम्स शुरू हो गए। किडनी, लिवर और फेफड़ों में इन्फेक्शन हो चुका था। 28 को ही वेंटिलेटर पर रख दिया गया।

पहली बार जयललिता के लिए अपोलो ने बाहर से बुलवाए एक्सपर्ट

– इस बीच, लंदन से डॉ. रिचर्ड जॉन बेले को बुलाया गया। सिंगापुर से भी डॉक्टरों की टीम आ चुकी है। अपोलो ने पहली बार बाहर से एक्सपर्ट बुलवाए हैं।

– जयललिता की देख-रेख में अभी अपोलो के 18 डॉक्टरों की टीम तैनात है। इन्हें 24 घंटे अस्पताल में ही रहने को कहा गया है।

– इनमें क्रिटिकल केयर ग्रुप के डॉ. रमेश वेंकटरमन, डॉ. आर सेंथिलकुमार, डॉ. बाबू अब्राहम और कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. वायवीसी रेड्‌डी प्रमुख हैं।

इसलिए हॉस्पिटल स्टाफ के फोन तक रखवा लिए गए

– टीम के कई डॉक्टर आईसीयू के आसपास बने वीवीआईपी वार्ड में ही रह रहे हैं। 9 नर्सो की शिफ्ट में ड्यूटी लगती है। इनके फोन तक ले लिए गए हैं।

– किसी से बात करने की भी मनाही है। डॉक्टरों व स्टाफ के फोन भी इंटेलिजेंस के सर्विलांस पर हैं। दो दिन पहले मेडिकल बुलेटिन में बताया गया- ‘शी इज इंटरैक्टिंग।’

– पर जयललिता के गले में ट्राइको नली लगाई गई है। इसी से वो फ्लूड और ऑक्सीजन ले रही हैं। नली के कारण बोलना संभव नहीं है। वे इशारों में जवाब दे रही हैं।

– लिखकर भी दे सकती थीं। कहा गया था कि जयललिता पैसिव फिजियोथेरेपी पर हैं। यानी हाथ-पैर हिला-डुला नहीं सकतीं।

– लंदन से आए डॉक्टर ने जब उन्हें मुस्कुराने को कहा तो वो मुस्कुराई भी थीं। अभी वो वेंटिलेटर पर हैं। वजन भी काफी घट गया है। हालत अब भी गंभीर बनी हुई है।

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