Even BJP MPs are angry over note ban, concerned about elections

cartoonThe Centre’s move to demonetise Rs 500 and Rs 1,000 notes has the BJP Members of Parliament worried. With elections for municipal Vidhan Sabha in Uttar Pradesh just a few months away, the state unit is hard at work trying to woo its core support base — traders and businessmen.

Party sources that BJP MPs admitted that the SP and BSP will managed to sway a chunk of this vote base in its favour during the 2016 assembly elections. The BJP machinery had swung into action three days after the Centre announced demonitisation. The party called an urgent meeting of its mandals to prepare for any fallout and brace for opposition attacks.

“The traders community has been hit hard and we are hoping that the matter regarding currency liquidity eases soon. Otherwise it could impact us in the civic agency polls,” a senior BJP leader said.

A senior party leader said, “Not many oppose demonetisation, but no one likes losing money either. We called the trade wing and reasoned with them.”

Delhi unit chief Satish Upadhyay said, “I believe this move is bigger than vote bank politics. It is in the nation’s interest — and no interest is bigger than that. People will realise its benefits in due course of time.”

Praveen Khandelwal, secretary general of the Confederation of All India Traders associations (CAIT), said they had shared the concerns of traders with the BJP.

“It is a great move for the nation and gives a chance for small businesses to flourish by killing monopoly of big houses. But it is true that due to cash crunch, our businesses are hit by 75 per cent. All we now want is an assurance that we will get subsidy in tax charged by banks on digital payments,” he said.

नोटबंदी की वजह से लोग परेशान, भाजपा सांसदों में भी गुस्सा

नई दिल्ली। नोटबंदी के बाद केंद्र सरकार के इसके पीछे के उद्देश्‍य को लेकर बदलते बयानों के बीच भाजपा के कई सांसदों में घबराहट है। नकदी की कमी के चलते लोगों की नाराजगी और गुस्‍से ने उनके माथे पर चिंता की लकीरें खींच दी हैं।

इंडियन एक्‍सप्रेस से बातचीत में पांच भाजपा सांसदों ने नाम ना छापने की शर्त पर बताया कि 500 और 1000 रुपये के नोट बंद करने के फैसले पर शुरुआती उत्‍साह के बाद अब साफ नाराजगी दिख रही है। उनका कहना है कि नकदी की कमी, एटीएम के बाहर लंबी लाइनों, स्‍थानीय अर्थव्‍यवस्‍था पर बुरे असर के चलते गुस्‍सा बढ़ रहा है।

इन सांसदों ने माना कि मजदूरों, बुनकरों, सब्‍जी बेचने वालों, छोटे दुकानदारों और छोटे उद्योग धंधों को नकदी की कमी के चलते समस्‍या के लिए ग्राउंड रिपोर्ट के चलत चिंताएं हैं और अन्‍य सेक्‍टर्स में नौकरियों की कमी सबसे बड़ा खतरा है।

भाजपा सूत्रों के अनुसार, अलग-अलग राज्यों के पार्टी नेताओं ने नोटबंदी की प्रक्रिया को लेकर अंदरूनी बैठकों में चिंताएं जाहिर की हैं। विशेष रूप से उत्‍तर प्रदेश के भाजपा नेताओं में ज्‍यादा खलबली है। गौरतलब है कि यूपी में 2017 में चुनाव होने हैं। इसके चलते नेतृत्‍व ने कुछ समय तक इंतजार करने और फिर उसके अनुसार चुनाव की रणनीति तय करने का फैसला किया है।

एक सांसद ने बताया, ”ताजा बयान कि नोटबंदी से डिजीटल इकॉनॉमी का रास्‍ता खुलेगा, यह चुनाव में नहीं बिकने वाला। अभी तो बिजली और मोबाइल नेटवर्क जैसे मुद्दे ही अनसुलझे हैं। हम दुकानदार या छोटे कारोबारी को डिजीटल होने को कैसे कह सकते हैं?”

भाजपा हालांकि उम्‍मीद बनाए हुए है और प्रधानमंत्री की विश्‍वसनीयता व लोगों के उनमें भरोसे के सहारे है। यूपी से आने वाले एक नेता ने बताया, ”लोगों का भरोसा उनसे( मोदी) से उठा नहीं है। वे भाजपा में विश्‍वास नहीं करते, उनका मानना है कि नरेंद्र मोदी मतलब देश के लिए अच्‍छा होगा।” कई सांसदों को वापस लिए गए नोटों के फिर से चलाए जाने की रिपोर्ट ने भी निराश किया है।

सांसदों ने बताया कि शुरुआत में कहा गया था कि जो पैसा आएगा वो लोगों की भलाई में लगाया जाएगा और इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर पर खर्च होगा। एक सांसद के अनुसार, ”आम जनता ने इस फैसले का स्‍वागत किया। उन्‍हें उम्‍मीद थी कि इससे जीवन आरामदायक बनेगा। लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में अब इसके उलट स्थिति है।”

बिहार से एक वरिष्‍ठ भाजपा सांसद ने बताया, ”पार्टी का धड़ा मानता है कि इस प्रकिया से उम्‍मीद के अनुसार परिणाम नहीं मिला। उन्‍होंने आला नेताओ को इस बारे में बता दिया है।” नोटबंदी के असर के सवाल पर एक दूसरे सांसद बोले, ”केवल मोदीजी ही जानते हैं।” इसी बीच पार्टी नेतृत्‍व ने सांसदों और राज्‍य नेताओं से इंतजार करने व डिजीटल बैंकिंग का प्रचार करने को कहा है। उन्‍हें किसानों व कारोबारियों के लिए ट्रेनिंग कैंप लगाने को कहा गया है।

 

 

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