Man is living in cave near Rashtrapati Bhavan for last 40 years

cave New Delhi: Recently, a man was detected jumping from a wall in the jungle near Rashtrapati Bhavan. High alert was sounded since the police took the man as a terrorist. However, search operations led the police to a Mazar which was hitherto unnoticed by them and other general people.

The mazar is situated an underground case where 68 years old Ghazi Nurul Hasan is living for the last 40 years. His son Mohammad Noor also resides. The police took them under custody and released the after several hours since there was no suspicion against them.

New Delhi :  The Delhi Police PCR was on Saturday alarmed the  control room that two suspects have entered the jungles at Parade Ground in front of President  House.

Heavy police force began search operation in the 73 -acre ground. After piercing through the jungles for  about 2 kilometers, they found two men sleeping in a  cave below a tomb.

Both the men were taken to Chanakyapuri Police  Station, where they were interrogated by an IB team. The two have been identified as Gazi Nurul Hassan, 60, and Mursalin, 22.

What is most surprising about the duo is the fact  that they have been living in the cave for the past  42 years. More jaw-dropping information about the  two has been revealed during interrogation.

The two men have voter ID Cards, Passports, Adhaar  Cards, Pan Cards with this address – DH, Dargaah  Khwaja Parade Ground, Mother Teresa Crescent.

Interestingly, an electricity meter has also been installed in the cave. But surprisingly, local police, PCR, IB, even the local intelligence unit is unware about these two men living in the area for good 42 years.

The men, who entered the area by climbing a wall in front of Gate No 29 of Rashtrapati Bhawan, have been using the same way for last 2 years for both entry and exit.

Nurul told News Nation, he used to teach Arabic in Rashtrapati Bhawan during the tenure of former President of India Fakhruddin Ali Ahmed.

He said that he has also conducted Urs festival in the tomb and he had even sought a written permission from police for the same.

राष्ट्रपति भवन के पास गुफा बनाकर 40 साल से रह रहा था यह शख्स

नई दिल्ली। राष्ट्रपति भवन के जंगल की दीवार को एक संदिग्ध द्वारा कूदता देखा गया और उसके आतंकी होने की पीसीआर कॉल से सुरक्षा एजेंसियों में हड़कंप मच गया। सूचना पर जंगल में सर्च ऑपरेशन करते हुए सुरक्षाकर्मी जब एक मजार पर पहुंचे तो दंग रह गए।

पुलिस एवं सुरक्षा एजेंसियों को अब तक इस मजार के संबंध में कोई जानकारी नहीं थी जबकि यहां पर अपने बेटे मोहम्मद नूर के साथ रह रहे 68 वर्षीय व्यक्ति गाजी नुरुल हसन ने दावा किया कि वे 40 साल से यहीं रह रहे हैं। चाणक्यपुरी थाना पुलिस ने दोनों को हिरासत में लेकर कई घंटे तक गहन पूछताछ की और फिर कोई संदिग्ध मामला नहीं होने पर दोनों को छोड़ दिया।

दरअसल, शनिवार शाम को पुलिस पेट्रोलिंग वैन जब राष्ट्रपति भवन के पीछे बीजी लाइन के पास से गुजर रही थी, तो एक पुलिसकर्मी ने जंगल की दीवार कूदते हुए एक युवक को देखा। पुलिसकर्मी को दीवार कूदने पर शक हुआ और उसने पीसीआर कॉल की कि दो संदिग्ध व्यक्ति राष्ट्रपति भवन के जंगल में घुसे हैं, जोकि आतंकी हो सकते हैं। राष्ट्रपति भवन की सुरक्षा से जुड़ा मामला होने के कारण तत्काल सुरक्षा एजेंसियों के साथ दिल्ली पुलिस टीम ने जंगल में छानबीन शुरू कर दी।

पुलिस को जंगल के अंदर मौजूद मजार के संबंध में पहले से कोई जानकारी नहीं थी। पुलिस जब वहां पहुंची तो गुफानुमा कमरे में गाजी नुरुल हसन (68) और मोहम्मद नूर (22) मिले। मोहम्मद नूर को नुरुल ने अपना बेटा बताया। नुरुल ने बताया कि वह यहां 40 साल से रह रहा है और मजार से होने वाली कमाई से अपना पेट पालता है। उसने दावा किया कि उसके पास पासपोर्ट और मतदाता कार्ड के साथ ही बिजली कनेक्शन भी हैं। उसने बताया कि मजार में लोग आते हैं।

पड़ताल में यह भी सामने आया कि नुरुल मजार की देखरेख करता था, लेकिन उसे आसपास के लोग नहीं जानते। उसने बताया कि जंगल में जड़ी-बूटी की तलाश के दौरान उसने इस मजार को ढूंढा था और फिर वहीं रहने लगा। इससे पहले वह ओखला में रहता था।

उसने यह भी दावा किया कि पूर्व राष्ट्रपति फखरुद्दीन अली अहमद के लिए धार्मिक उपदेश देता था। उधर, पुलिस अधिकारियों का कहना है कि लुटियंस दिल्ली इलाके में वीवीआईपी अलर्ट होने पर यह एक रुटीन अभ्यास था। पुलिस अधिकारियों ने माना कि जंगल के अंदर मौजूद मजार के संबंध में जानकारी नहीं थी।

 

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