Special ink in Rs. 2000 note leading to their detection when stacked in black

noteNEW DELHI: After the Income Tax department conducted many successful raids against black money hoarders in several parts of the country post demonetisation, the latest rumour doing the rounds on social media is ‘entrusting’ the credit for seizures by the I-T sleuths to the presence of radioactive ink in the new currency notes of Rs 2000 denomination.

According to message that went viral on social media, a radioactive isotope of phosphorous- P32 is used in the new Rs 2,000 currency notes to help I-T department detect illegal wealth.

“Whenever a huge lot of cash is amassed at a suspected place, the radioactive indicator present in currency notes help I-T sleuths to trace the location,” the message claims.

The rumour is being considered true because of recently conducted raids by the Income Tax department across the country.

In a startling catch, the Income Tax department last week seized Rs 5.7 crore cash in new notes, 32 kgs of gold biscuits and jewellery and Rs 90 lakh worth old notes stashed inside the bathroom tiles of a hawala dealer in Karnataka.

Based on such IT raids people are considering the ‘radioactive’ roumour to be true.

ABP News, in its Viral Sach segment, contacted nuclear scientist Dr. SB Lochab to know whether radioactive ink can be utilised as a trace element in currency notes or not.

“If any radioactive component is added into ink, it becomes radioactive ink. Radioactive trace elements, which would be in micrograms, are difficult to trace even with sensitive instruments,” Dr. Lochab said.

“Our body also contains trace elements in radioactive form but those elements cannot be detected with any external instrument. Even if we assume Radioactive ink in the new currency notes is used as a trace element, it’s impossible to detect it with sensor or any other external instrument,” the nuclear scientist said.

नई दिल्ली.सोशल मीडिया में दो हजार के नए नोट के लिए अफवाहें अब आम हो गई है। इसी कड़ी में सोशल मीडिया में नया मैसेज वायरल हो रहा है। इसमें दावा किया जा रहा है कि दो हजार के नए नोट में एक रेडियोऐक्टिव इंक लगी हुई है। यही स्याही इनकम टैक्स डिपार्टमेंट को कालेधन की सूचना दे रही है। इसी के चलते इनकम टैक्स डिपार्टमेंट के छापों में काला धन पकड़ने में कामयाबी मिल रही है। क्या है ये रेडियोएक्टिव इंक…

– वायरल मैसेज के दावे के मुताबिक दो हजार के नए नोट में इस्तेमाल की गई रेडियोऐक्टिव इंक में फॉस्फोरस-32 है।

– दरअसल फॉस्फोरस-32 में रेडियोऐक्टिव रेडिएशन होते हैं। ऐसे में जब नोट काफी संख्या में एक जगह इकट्ठा होंगे तो उसमें काफी ज्यादा रेडिएशन होगा।

– ऐसे में डिटेक्टर्स उस नोट को ढूंढ लेंगे। इसी तरह से यदि कोई भारी संख्या में दो हजार के नोट जमा करेगा तो इनकम टैक्स डिपार्टमेंट को पता चल जाएगा।

नहीं है किसी तरह का एक्सटर्नल इंस्ट्रूमेंट

– साइंटिस्ट के मुताबिक स्याही में किसी भी कम्पोनेंट को रेडियोएक्टिव बना सकते हैं और उसे रेडियोएक्टिव कह सकते हैं।

– यदि इसमें कोई ट्रेस एलिमेंट है तो उसको डिटेक्ट करने के लिए आज तक कोई एक्सटर्नल इंस्ट्रूमेंट नहीं है ।

– नोट में यदि कोई रेडियोएक्टिव एलिमेंट है भी तो किसी तिजोरी या दूसरी जगह से उसे डिटेक्ट नहीं किया जा सकता है।

– ऐसे में सोशल मीडिया में फैलाया जा रहा है ये मैसेज झूठ है।

15 दिन बाद नहीं कर सकते उसे डिटेक्ट

– एक्सपर्ट्स के मुताबिक कोई भी रेडियोएक्टिव एलिमेंट जब रेडियो किरणें छोड़ रहा होता है तो वो अंदर ही अंदर खत्म रहा होता है।

– यानी उसकी लाइफ आधी होते ही वो भी आधा हो जाता है। फॉस्फोरस-32 की हाफ लाइफ 14.92 दिन होती है।

– आप अगर 15 दिन तक उन नोटों को छुपा ले गए तो 15 दिन बाद उन्हें नहीं डिटेक्ट किया जा सकेगा।

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