Man becoming jobless due to note ban commits suicide in Agra

suicideAgra: Shoemaker Haribhan (22) who had become jobless committed suicide. He was hungry for last two days. When he heard baby of his sister in law crying due to hunger, Haribhan lost patience and committed suicide. The family was so poor that even last rites of Haribhan were performed by collecting donations.

आगरा.नोटबंदी से बेरोजगार हुए जूता कारीगर हरिभान ने दो दिन की भूख से तंग आकर जान दे दी। हरिभान खुद तो भूखा रह कर गुजारा कर रहा था, लेकिन जब उसकी विधवा भाभी के सवा महीने के बच्चे को भूख से बिलखता देख हरिभान का सब्र टूट गया और उसने फांसी लगा ली। मरने के बाद लोगों की मदद से चंदा जमा कर उसका अंतिम संस्कार हुआ।

घर में दो दिन से किसी ने नहीं खाया था खाना

– जीवनी मंडी के नगला परमा के हरिभान की उम्र महज 22 साल थी।
– एक साल पहले भाई वेदप्रकाश की कुत्ता काटने के बाद इलाज नहीं मिलने से मौत हो गई थी, जिसके बाद घर की जिम्‍मेदारी उस पर थी।
– हरिभान के ऊपर भाई के चार बच्चों, एक बहन अंजू, मां श्यामवती और भाभी पिंकी की जिम्मेदारी थी।
-8 नवंबर को 500 और 1000 के नोट बैन होने के बाद कुछ ही दिनों में जूता उद्योग बिल्‍कुल ठप्प हो गया था और हरिभान को भी नौकरी से निकाल दिया गया था।
– हरिभान पहले ही लोगों का कर्जदार था और नौकरी जाने के बाद उसके आगे खाने का संकट आ गया था।
– परेशान होकर उसने मजदूरी करने की सोची, लेकिन वहां भी काम नहीं मिला।
– हरिभान की भाभी पिंकी ने बताया, ”घर में दो दिन से चूल्हा नहीं जला था और किसी ने कुछ नहीं खाया था।”
– ”पहले दिन पड़ोस की एक महिला दलिया दे गई थी तो हरिभान को छोड़ सबने थोड़ा-थोड़ा बांटकर खाया था, लेकिन उससे भूख खत्म भी नहीं हो पाई थी।”
– ”15 नवंबर की देर रात मेरा सवा महीने का बच्‍चा भूख से बिलखने लगा। मैंने बोतल में पानी भरकर बच्चे को पिलाना शुरू किया तो हरिभान यह देखकर रोने लगा। जब रात में सब सो गए तो करीब 3 बजे उसने पंखे के कुंडे में फांसी लगा कर जान दे दी।”

परिवार में कोई नहीं बचा कमाने वाला

– हरिभान की बहन अंजू ने बताया, शायद ये परेशानी एक-दो दिन और रहती, लेकिन भाई की मौत के बाद तो यह हमेशा की परेशानी हो गई। अब परिवार में कोई कमाने वाला नहीं है। नोटबंदी के बाद हर गरीब के घर का यही हाल है।
– मां श्यामवती ने कहा, गरीबी तो हमारी आदत हो गई थी, लेकिन नोटबंदी ने लाचार कर दिया।
– मेरा बेटा मरा नहीं है नोटबंद कर उसकी हत्‍या की गई है।
– वहीं, हरिभान की मौत के बाद भाभी पिंकी का बुरा हाल है। वो ढंग से बोल नहीं पा रही हैं। उन्‍होंने कहा, हरिभान मेरे भाई से बढ़कर था। मेरे बच्चों की भूख न देख सका। काश मैं उसके सामने बच्चे को पानी न पिलाती।

मदद के लिए बढ़े हाथ

– इस बारे में एसओ छत्ता उत्तम चन्द्र पटेल ने बताया, युवक ने आर्थिक तंगी के कारण आत्महत्या की है। मामले की जानकारी डीएम को दे दी गई है।
– मीडिया में खबरें चलने के बाद राजनीतिक पार्टी और कुछ समाज सेवियों ने परिवार की मदद की बात कही है।
– बता दें, नोटबंदी के बाद से जूता उद्योग बिल्‍कुल ठप हो गया है। बड़े एक्सपोर्टर तो अपना काम चला रहे हैं, लेकिन छोटी फैक्ट्रियों में काम करने वाले अधिकतर मजदूर बेरोजगार हो गए हैं और फैक्ट्रियां बंद होने के कगार पर हैं।

 

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