Woman returns home 35 years after death due to snakebite

deadAbout 35 years ago, a woman was bitten by snake. When all efforts to revive her failed, she was flowed in river Ganga as per local beliefs. But, now the same has returned home alive after so much time and crowds are coming to see her. The incident occurred at village Inayatpur in Kanpur district. The woman Vilas Gautam is the mother of Anokhe Lal.

जिसे मरने के बाद अपने हाथों गंगा में बहा दिया, 35 साल बाद वह लौट आई घर

सांप के काटने के बाद जिस महिला की 35 साल पहले मौत हो गई थी. झाड़-फूंक के बाद भी जब वह जिंदा नहीं हुई तो परिजनों ने उसे गंगा नदी में बहा दिया था.

घर के लोगों ने उसकी मौत के बाद सारे कर्मकांड कर दिए. धीरे-धीरे समय के साथ गमगीन परिवार ने उसे भुला भी दिया, लेकिन अब 35 साल बाद वह भूली हुई दास्तां फिर से सबको याद आ गई.

झलक देखने को उमड़े लोग

दरअसल, जिस महिला को मृत मानकर लोगों ने गंगा में बहा दिया था, आज वह अपने घर वापस आ गई है. घरवाले अब बहुत खुश हैं और इसे चमत्कार मानकर ईश्वर को धन्यवाद कर रहे हैं. महिला को जीवित देखकर ग्रामीण भी हैरान हैं.

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अब यह खबर जंगल में आग की तरह फैल रही है और आसपास के लोग महिला को देखने के लिए वहां पहुंच रहे हैं. यह मामला उत्तर प्रदेश में कानपुर के बिधनू थाना क्षेत्र के इनायतपुर गांव का है, जहां रहने वाले अनोखे लाल की मां विलास गौतम को सांप ने 35 साल पहले काट लिया था.

…और गंगा में बहा दिया

परिवार के सदस्यों ने उनको जीवित करने के लिए झाड़-फूंक कराया, लेकिन जब भी वह जीवित नहीं हुई तो परिजनों ने उनको गंगा में प्रवाहित करने का फैसला किया.

परिजन विलास देवी के शव को लेकर कानपुर के सिद्धनाथ घाट पहुचे और उनके शव में बालू बांध कर बीच गंगा में प्रवाहित कर दिया. इसके बाद घर आने के बाद उनकी तेहरवीं और अन्य कर्मकांड कर दिए.

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जब विलास देवी की मौत हुई थी तो इनके दो बेटे बहुत छोटे थे परिवार में पति कल्लू और दो बेटियां थी. विलास देवी की मौत के बाद इनके पति कल्लू की भी 20 साल बाद मौत हो गई थी.

आंख खुली तो गंगा किनारे पर थी

वापस लौटी विलास देवी ने बताया कि अपने बच्चों को लेकर जमीन पर लेटी थी, तभी मेरे दाहिने हाथ में सांप ने काट लिया था. जैसे ही मुझे सांप ने काटा तो मैंने बच्चों और अपने पति को जगाया. वह लोग दिया लेकर उसे ढूंढते रहे, लेकिन वह नहीं मिला.

इसके बाद मैं कुछ देर बेहोश हो गई. इसके बाद मुझे कुछ याद नही हैं. जब मेरी आंख खुली तो मैं गंगा किनारे पर थी और दो मछुआरों ने मुझे उठाकर एक मंदिर के पास रख दिया था.

सिर्फ गांव का नाम याद था

इसके बाद उस मंदिर की एक मालिन थी. जब वह आई तो उसने मेरा पता भी पूछा, लेकिन मैं गंवार थी. मुझे कुछ नही पता था, सिर्फ अपने गांव का नाम याद था.

इसके बाद मुछे कपड़े और खाना खाने को दिया और तीन साल तक उसी मंदिर में सेवा करती रही. यह मंदिर गंगा के किनारे बना था. तीन साल बाद मालिन मुझे कन्नौज के तेजपुर गांव ले गई. उस गांव में उसके मिलने वाले रहते थे, उसी परिवार को उसने मुझे सौप दिया.

अब जाकर मिला मां का प्यार

इसके बाद से वह मालिन कभी मुझसे मिलने के लिए नहीं आई. वह परिवार मुझे तीन वक्त का खाना देता था. इसके बदले में मैं भी उनके घर और खेत का काम कर देती थी. वहां पर भी मुझे किसी प्रकार की कोई दिक्कत नहीं थी.

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विलास के बेटे अब बड़े हो चुके हैं. उनके बेटों के मुताबिक जब मां को सांप ने काटा था तो बहुत छोटा था. तब मां का प्यार नहीं मिल पाया था, लेकिन मेरी मां अब वापस आ गई है, इससे बड़ी ख़ुशी कुछ नहीं हो सकती है.

परिवार में जश्न

मुझे ऐसा लग रहा है कि मेरा सब कुछ वापस लौट आया. मेरे परिवार में जश्न का माहौल है. मेरी बहनें इतनी खुश है, जिसका ठिकाना नहीं है.

मेरी मां की धीरपुर गांव में भी रिश्तेदारी है. वह पहले वही रहती थी. धीरपुर गांव की एक लड़की, जिसकी शादी तेजपुर गांव में हुई थी, उन्होंने बताया कि तेजपुर गांव की वह बहू थी तो उसका घर से निकलना बहुत कम था. किसी तरह मां की मुलाकात उस लड़की किरन से हो गई.

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इस तरह लौटी अपने घर

मां और किरन के बीच अक्सर बातचीत होने लगी, तभी बातों-बातों में किरन ने मां पूछा की आप कहां कि रहने वाली है तो वह धीरपुर और इनायत पुर गांव की बात बताने लगी.

विलास के बेटे बताते हैं कि यह बात किरन ने धीरपुर में रहने वाले रिश्तेदार को बताई तो वह एक दिन इनायतपुर आए तो पूरी बात बताई. इसके बाद विलास अपने घर लौट आई.

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