Non-bailable case against Sudhir of Zee news for misreporting

mamta2In what might be a ‘real’ attack against press freedom, in an announcement made on Twitter, the senior editor and business head of Zee News, Sudhir Chaudhary revealed that the Government of West Bengal had filed an FIR against him and Zee News reporter Pooja Mehta for covering the Dhulagarh Riots, which largely went unnoticed by a large section of the media and eminent mediapersons as part of their ‘selective outrage policy‘.

Now it will be interesting to see what would the reaction of the the Editors Guild of India be. Just  recently the body of top journalists had drawn the conclusion that the token 1 day token ban on NDTV for giving away security locations during the Pathankot attack was reminiscent of the Emergency days. So surely an FIR using non-bailable offences, which might lead to media persons actually going to jail just like during the emergency, might warrant some form of a protest from the Guild?

Also what needs to be seen is that how does the whole intolerance brigade react to the situation and would people now return the Banga Bibhushan award which the West Bengal government gives to personalities from various fields.

गैर-जिम्मेदाराना रिपोर्टिंग पर ज़ी-न्यूज़ के संपादक सुधीर चौधरी पर मुकदमा दर्ज

कोलकाता। हावड़ा जिले के धुलागढ़ में सांप्रदायिक दंगे की रिपोर्टिंग को लेकर ज़ी न्यूज़ के एडिटर सुधीर चौधरी, रिपोर्टर पूजा मेहता और चैनल के कैमरामैन तन्मय मुखर्जी के खिलाफ पश्चिम बंगाल में गैर-जमानती धारा के तहत केस दर्ज किया गया है। एफआईआर में तीनों लोगों के खिलाफ विभिन्न समूहों के बीच शत्रुता बढ़ाने (आईपीसी की धारा 153ए) के आरोप लगाए गए हैं।

खबरों के अनुसार यह एफआईआर पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कराई है। ममता बनर्जी ने आरोप लगया है कि धुलागढ़ में सांप्रदायिक हिंसा की रिपोर्टिंग और सुधीर चौधरी ने कथित तौर पर गैर-जिम्मेदाराना तरीके से इस खबर को पेश किया था।

गौरतलब है कि 12 दिसंबर को एक धार्मिक जुलूस को लेकर धुलागढ़ में दो संप्रदायों के बीच झड़प के बाद एक समुदाय के मकानों और दुकानों में दूसरे समुदाय के उपद्रवी लोगों ने आग लगा दी थी और लूटपाट की थी। इस हिंसा में कई लोग घायल भी हुए थे। पीड़ित समुदाय के लोगों ने पुलिस और पश्चिम बंगाल सरकार पर मूकदर्शक बने रहने और दंगाइयों को संरक्षण का आरोप लगाया था। तीनों पत्रकारों के खिलाफ 19 दिसंबर को संकराइल थाने में एफआईआर दर्ज की गई थी, लेकिन इसकी जानकारी अब सामने आई है।

सुधीर चौधरी ने ट्विटर पर सवाल किया है कि क्या सच दिखाने के लिए एफआईआर दर्ज की गई है? उन्होंने फेसबुक पर लिखा है, ‘आप सभी को बता दूं कि ममता बनर्जी सरकार ने मेरे, ज़ी न्यूज़ रिपोर्टर पूजा मेहता और कैमरापर्सन तन्मय मुखर्जी के खिलाफ धुलागढ़ दंगों की कवरेज करने के लिए एफआईआर दर्ज कर ली है। एफआईआर गैर-जमानती धाराओं के तहत दर्ज किया गया है, जो इस बात का संकेत देने के लिए पर्याप्त है कि उनका इरादा मुझे और मेरे सहयोगियों को गिरफ्तार करने का है।’

लेकिन लोगों ने इस पूरे मामले पर ज़ी न्यूज़ के कवरेज की खिंचाई भी की। साथ ही लोगों ने उनके इतिहास पर सवाल उठाते हुए 100 करोड़ की फिरौती के मामले पर भी जांच की मांग की।

 

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