Patwa; the BJP leader who hated Modi openly and loved Arjun Singh of Congress

patwaFormer Union minister and two-time Madhya Pradesh chief minister Sunderlal Patwa died of cardiac arrest at his official residence in Bhopal on Wednesday. He was 92. Patwa was found unconscious on Wednesday morning and was rushed to a private hospital where he was declared ‘brought dead’.

Prime Minister Narendra Modi, Madhya Pradesh chief minister Shivraj Singh Chouhan, former chief minister Digvijaya Singh, former Union minister Jyotiraditya Scindia and several other leaders condoled the demise of Patwa.

Patwa who had been chief minister of Madhya Pradesh twice – once from January 1980 to Feb 1980 and later from March 1990 to December 1992 – was known as a tough administrator.

It was during his second tenure as the chief minister when the state government was dissolved in the wake of demolition of the disputed shrine at Ayodhya by karsevaks in 1992. Later, Congress was voted to power in 1993.

He served as a minister in the Atal Bihari Vajpayee cabinet at the Centre from October 1999 to September 2001. He was an MLA from 1957 to 1967, from 1977 to 1997 and from 1998 to 1999. He had been leader of Opposition in the state assembly as well. He was elected to Lok Sabha twice and was known as the mentor of chief minister Shivraj Singh Chouhan.

Coming from Malwa region, he got associated with Rashtriya Swayamsevak Sangh (RSS) at the age of 18. He was an active member and leader of the Bharatiya Jana Sangh and was jailed under the Maintenance of Internal Security Act during the Emergency from June 1975 to January 1977. He took part in RSS movements and held several posts in the Bharatiya Jana Sangh and the Bharatiya Janata Party. He went on to head the state unit of the party in 1996.

भोपाल। मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री सुंदरलाल पटवा का 92 साल की उम्र में बुधवार को निधन हो गया। भाजपा के वयोवृद्ध नेता कहे जाने वाले पटवा अपने कड़क स्वभाव की वजह से जाने जाते हैं।इस मौके परdainikbhaskar.com बता रहा है उनके जीवन की कही-अनकही बातों के बारें में।

पुरानी बातें

– बात 1998 की है, उस समय मध्यप्रदेश में जल्दी ही विधानसभा के चुनाव होने वाले थे। प्रदेश के बीजेपी लीडर ये मानकर चल रहे थे इस बार सरकार बननी पक्की है। ऐसे में बीजेपी के केंद्रीय नेत्तृव ने पार्टी के राष्ट्रीय महामंत्री नरेन्द्र मोदी को एमपी का प्रदेश प्रभारी बनाकर भोपाल भेज दिया। पार्टी ने ऐसा इसलिए करा, क्योंकि इससे पहले मोदी को जहां भी प्रभारी बनाकर भेजा गया वहां बीजेपी की सरकार बनी। कुशाभाऊ ठाकरे उस समय पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष थे।

– मध्यप्रदेश आते ही नरेंद्र मोदी ने तत्कालीन मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह पर हमला करना शुरू कर दिया। पटवाजी और बीजेपी के संगठऩ मंत्री कृष्णमुरारी मोघे को को मोदी को मध्यप्रदेश भेजा जाना पसंद नहीं आया। उन्होंने इस बात की शिकायत भी कुशाभाऊ ठाकरे से की। उन्होंने कहा कि जब मध्यप्रदेश में बीजेपी की सरकार बन ही रही है तो जीत की सेहरा नरेन्द्र मोदी के सिर पर क्यों बांधा जा रहा है। पटवाजी कहते थे कि ये बाहर का आदमी मध्यप्रदेश में आकर क्या कर रहा है।

नरेन्द्र मोदी उस समय प्रदेश के शक्तिशाली पटवा खेमे के नेताओं के अघोषित बॉयकाट का शिकार थे। मोदी उस समय अपने आपको अपनी ही पार्टी में अपने ही लोगों के बीच अछूत जैसा महसूस करते थे। ये खेमा मोदी के सामने कोई बात न तो करता था और ना ही उनकी सलाह लेता था। ऐसे हालत में बैठकों में मोदी अपनी बात कहकर चले जाते थे। हालत इतने खराब थे कि मोदी अपनी देखभाल के लिए दो-तीन लोगों को दिल्ली से साथ लेकर आते थे।

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