Om Puri passes into history, died at 66

om-puriVeteran actor Om Puri, who gave countless memorable performances in movies of diverse genres, died at his residence on Friday morning after a massive heart attack. He was 66. “He passed away this morning due to a massive heart attack at his residence in suburban Andheri. It’s shocking,” a family source said.

Among the pioneers of India’s parallel cinema, Puri’s filmography spans across Bollywood and Hollywood, independent and art films.

Known for his versatility, Puri’s acclaim earned him the Padma Shri, the country’s fourth highest civilian award, in 1990.

The shocking news of his death spread almost immediately on social media, with industry heavy weights such as Karan Johar, Akshay Kumar and Javed Akhrar and Anupam Kher condoling the loss.

Prime Minister Narendra Modi also tweeted his condolences over Puri’s demise, and recalled his long career in theatre and films.

Born to a Punjabi family in Ambala, Haryana, Puri graduated from the Film and Television Institute of India, Pune. He later graduated from the National School of Drama in 1973, where colleague Naseeruddin Shah was also a student.

In 1976, Puri made his movie debut in Marathi, in the film Ghashiram Kotwal.

Some of his most notable films include Bhavni Bhavai, Sandgate, Ardh Satya, Mirch Masala, Dharavi, Aakrosh, Maachis, Gupt, Dhoop, Yuva, Don, Agneepath, Bajrangi Bhaijaan and others.

He also featured in several mainstream Pakistani, British and Hollywood commercial films, earning international fame in British films such as My Son the Fanatic, East Is East and The Parole Officer among others.

In Hollywood, he is remembered in films such as City of Joy, Wolf and The Ghost and the Darkness.

मुंबई. ओम पुरी का शुक्रवार सुबह दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया। वह 66 साल के थे। उन्होंने 100 से ज्यादा हिंदी और 20 हॉलीवुड मूवी में काम किया था। उन्हें अर्ध सत्य और आरोहण मूवी के किरदार के लिए बेस्ट एक्टर के नेशनल अवॉर्ड से नवाजा गया। 1990 में पद्मश्री भी मिला था। बता दें कि इन दिनों वे सलमान के साथ ट्यूबलाइट की शूटिंग में बिजी थे। जून में ईद पर रिलीज होने वाली कबीर खान की इस मूवी में ओम एक गांधीवादी नेता का रोल कर रहे थे। उनका अंतिम संस्कार शाम 6:30 बजे ओशिवरा में किया जाएगा। गुरुवार को शूटिंग कर लौटे थे…
– उनके पड़ोसियों के मुताबिक, ओम गुरुवार शाम एक फिल्म की शूटिंग खत्म कर घर लौटे थे।
– शुक्रवार सुबह उनके ड्राइवर ने घर दरवाजा खटखटाया। दरवाजा न खोले जाने पर ड्राइवर ने ही स्थानीय ओशिवारा पुलिस स्टेशन को सम्पर्क किया।
– फिलहाल उनके पार्थिव शरीर को पोस्टमॉर्टम के लिए कूपर हॉस्पिटल ले जाया गया। हॉस्पिटल में शबाना आजमी, सुशांत सिंह और अशोक पंडित मौजूद थे।
पीएम ने ट्वीट कर दुख जताया..
– पीएम मोदी ने ओम पुरी के निधन पर दुख जताया। फिल्म और थियेटर में उनके काम और योगदान को याद किया।
– मधुर भंडारकर ने कहा कि यकीन नहीं होता कि इतना एक्टिव इंसान इस तरह अचानक चला गया, बहुत दुखद बात है, फिल्म इंडस्ट्री में उनका बहुत कमाल का योगदान रहा है।
– डेविड धवन ने उन्हें याद करते हुए कहा- “बड़ा धक्का लगा उनकी डेथ की न्यूज सुनकर। 1974 में हम रूम मेट रह चुके थे। वो ब्रिलियंट एक्टर थे।”
– शबाना आजमी ने कहा- “उनसे करीब की दोस्ती रही थी, उनके साथ कई फिल्मों में काम किया, उनका निधन होना बहुत अफसोस की बात है।”
– रजा मुराद ने कहा- “ज्यादा शराब पीने से ओम पुरी की सेहत खराब हो गई थी। बेहद आम शक्ल सूरत होने के बावजूद उन्होंने अपनी एक्टिंग का लोहा मनवाया।”
– महेश भट्ट ने ट्वीट कर ओम को श्रद्धांजलि दी। लिखा- “अलविदा ओम! आज तुम्हारे साथ मेरी भी जिंदगी का एक हिस्सा चला गया। मैं उन लम्हों को कैसे भूल सकता हूं। जब हमने फिल्म और जिंदगी की बातें करते हुए कई रातेंं गुजारी थीं।
कौन थे ओम पुरी?
– ओम पुरी का जन्म 18 अक्टूबर, 1950 को अंबाला में एक पंजाबी परिवार में हुआ था। हिंदी फिल्मों के अलावा पाकिस्तान और हॉलीवुड की फिल्मों में काम किया।
– पुरी ने पुणे के फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (FTII) से ग्रेजुएशन किया।
– उन्होंने दिल्ली के नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा (एनएसडी) से भी पढ़ाई की। यहां नसीरुद्दीन शाह उनके क्लासमेट थे।
– उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा अपने ननिहाल पंजाब के पटियाला से पूरी की। 1976 में पुणे के FTII से ट्रेनिंग ली थी।
– बाद में ओमपुरी ने अपने निजी थिएटर ग्रुप “मजमा” को बनाया था।
दो बार मिला नेशनल अवॉर्ड
– उन्हें दो बार नेशनल अवॉर्ड मिला।
– पहली बार 1982 में आरोहण के लिए, वहीं दूसरी बार 1984 में अर्ध सत्य मूवी के लिए बेस्ट एक्टर का अवॉर्ड मिला।
कैसा रहा फिल्मी सफर?
– साधारण चेहरे के बावजूद ओम पुरी अपनी खास एक्टिंग, आवाज और डायलॉग डिलिवरी के लिए जाने जाते थे।
– 1976 में आई उनकी पहली फिल्म ‘घासीराम कोतवाल’ थी।
– अमरीश पुरी, स्मिता पाटिल, नसीर और शबाना आजमी के साथ मिलकर उनके कई यादगार फिल्में दीं।
– 1980 में आई भावनी भवई और आक्रोश, 1981 में सद्गति, 1982 में अर्धसत्य और डिस्को डांसर, 1986 में आई मिर्च मसाला और 1992 की धारावी से शोहरत मिली।
– सनी देओल के साथ घायल औऱ 1996 में गुलजार की माचिस में उन्होंने सिख आतंकवादी का किरदार निभाया। ‘माचिस’ में बोला गया उनका डायलॉग ‘आधों को 47 ने लील लिया और आधों को 84 ने’ काफी मशहूर हुआ।
– ‘जाने भी दो यारो’, ‘हेरा-फेरी’, ‘चाची 420’, ‘मालामाल वीकली’, ‘सिंग इज किंग’, ‘बिल्लू’ में पुरी कॉमिक रोल में नजर आए।
– विशाल भारद्वाज की ‘मकबूल’ में नसीरुद्दीन शाह के साथ पुरी एक ऐसे पुलिसवाले के रोल में थे जो कुंडली बनाने में महारत रखता है।
– ओम पुरी ने सीरियल ‘भारत एक खोज’, ‘कक्काजी कहिन’, ‘सी हॉक्स’, ‘अंतराल’, ‘मि. योगी’, ‘तमस’ और ‘यात्रा’ में भी काम किया।
– 2004 में उन्हें ऑनरेरी ऑफिसर ऑफ द ऑर्डर ऑफ द ब्रिटिश एम्पायर का अवॉर्ड दिया गया।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *