Despite father’s opposition, this girl entered this field and is earning crores

Shweta RathoreShweta Rathore does not like being called a bodybuilder. Despite her father’s opposition, this girl has entered bodybuilding and is earning crores of rupees. The 27-year-old from Jaipur, recently crowned Miss India “sports physique” champion, explains that her category, a new subset of bodybuilding events, is different from traditional muscle-flexing. For example, it requires only a subtle amount of tanning “so you don’t look orange”.

With a demand for a body that is “athletic and aesthetically pleasing”, physique building has been attracting younger participants and more women to the spectator sport. Competitors are judged on looks and fitness, a combination that Rathore seems to have perfected by now, having won medals in the Miss Mumbai, Miss India, Asia and World competitions. In addition to smaller towns, physique sports are finding takers among city girls too.

Sports physique evaluates strength and flexibility. Newer categories such as “fitness physique” (which Rathore won at the Miss World event) and “model physique” further require women to have dancing skills and the ability to pull off a sequinned bikini. An engineer by qualification, Rathore has been training in gyms since the age of 15, maintaining a 24-inch waist. Her family backed her ambitions of being a fitness expert, which brought her to Mumbai five years ago.

Shweta Rathore: Built and beautiful Her success has brought in endorsement deals with health supplement brands. Rathore wants to use this new-found celebrity to launch a fitness programme next month. It will focus on busting fitness myths and making girls competition-ready. “A lot of people can build a body. To stand out, you have to know all about technique and presentation.” She says she will train blind girls and push for them to be included in regular championships instead of a special category. “That will take work but I am up for the challenge.”

During workouts, which she calls “meditation”, the former marketing executive keeps away from her mobile phone and the internet. But there is always time afterwards to click a few selfies for Instagram and Snapchat, where Rathore has as many as 120,000 followers. For our camera too, she cracks an effortless smile and assumes adroit poses that highlight the gentle undulation of her biceps. Rathore now feels that she has a lot to share for the uninitiated.

पिता नहीं चाहते थे बेटी करे ये काम, उसी से फेमस बनी अब ऐसी लग्जरी Life

मार्शल आर्ट्स में ट्रेंड श्वेता ने मुंबई में आयोजित ‘मिस इंडिया स्पोर्ट्स फिजिक’ चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल हासिल कर चुकी हैं।

जयपुर. फिटनेस और बॉडी बिल्डिंग की दुनिया का जाना माना नाम बन चुकी श्वेता राठौर इन दिनों अपने घर जयपुर में हैं। कई दिनों से जयपुर में छुट्टियां मना रही श्वेता ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर कई फोटो शेयर की। बता दें कि श्वेता मुंबई में खुद का एनजीओ चलाती हैं साथ ही वे ‘मिस इंडिया स्पोर्ट्स फिजिक’ चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल भी हासिल कर चुकी हैं। ऐसी है लग्जरी लाइफ…

– वेट लिफ्टिंग, पुल अप्स, पुश अप्स और मार्शल आर्ट्स में ट्रेंड श्वेता ने मुंबई में आयोजित ‘मिस इंडिया स्पोर्ट्स फिजिक’ चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल हासिल कर चुकी हैं।

– वे देश-विदेश में होने वाले कई बड़े इवेंट्स में हिस्सा भी ले चुकी हैं।

– श्वेता के पास खुद की ऑडी कार है, जिसकी कई फोटो वे सोशल मीडिया पर भी शेयर कर चुकी हैं।

– मुंबई में रहने वाली श्वेता अक्सर बड़े इवेंट्स और पार्टीज में नजर आती हैं।

– वे Rado जैसे अपनी महंगी घड़ियों की फोटो भी सोशल मीडिया पर शेयर करती हैं।

स्कूल में सब कहते थे मोटी…

-श्वेता बताती हैं, स्कूल में सब मुझे मोटी कहकर बुलाते थे। हालांकि मैं मोटी नहीं थी बस मेरा स्ट्रक्चर थोड़ा अलग था।

-इसलिए मैंने 11वीं क्लास से वर्कआउट करना शुरू किया। शुरुआत में पिता को मेरा जिम जाना मंज़ूर नहीं था। लेकिन मैं ट्यूशन के समय जिम में वर्क आउट करती थी।

– मुझे इसमें इतना मजा आता था कि जब बाकी लोग 100 क्रंचेज करके रुक जाते थे, मैं हजार करके भी थकती नहीं थी।

– धीरे-धीरे बॉडी बिल्डिंग में आ गई। मैं इस मिथ को तोड़ना चाहती थी कि लड़कियां मसल्स बनाने पर खूबसूरत नहीं लगतीं।

– मेरी मेहनत के कारण पिता भी मां और भाई की तरह मेरा साथ देने लगे।

वर्कआउट करने छोड़ी नौकरी…

– श्वेता ने आगे बताया कि उन्हें मालूम था एजुकेशनल क्वालिफिकेशन बेहद जरूरी है इसलिए पहले इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्यूनिकेशन में इंजीनयिरिंग की डिग्री ली और फिर 8 साल एक कंपनी में बतौर वाइस मार्केटिंग हेड काम किया।

– वो कहती हैं, “कुछ पाने के लिए खुद को बहुत कुछ खोना पड़ता है।

– गर्मियों की छुट्टियों में जब सब दोस्त और परिवार के लोग घूमने जाते थे, मैं बस जिम में वर्कआउट करती थी।

– खुद की काबिलियत साबित करने की जिद थी और खुद से हारना नहीं चाहती थी। प्रोफेशनल बनने के बाद भी जिम का साथ नहीं छोड़ा।

– ऑफिस के बाद शाम को 1 घंटा जिम जाती। अपने आप को पूरी तरह से इंडिपेंडेंट बनाने के बाद मैंने अपने सपने की ओर पहला कदम उठाया। जॉब छोड़कर पूरा समय वर्कआउट को देना शुरू किया।’

मुंबई में चलाती हैं NGO…

श्वेता मुंबई में एक एनजीओ भी चलाती हैं, जहां उनके जैसे सपना रखने वालों को पढ़ाया जाता है। श्वेता कहती हैं,”महिलाओं को अपने सपनों को सीमा में नहीं बांधना चाहिए। भारत में टैलेंट हैं, लेकिन सही राह नहीं। यहां महिलाएं अपने परिवार संभालने में अपनी हेल्थ को भूल जाती हैं। यही वजह है देश में महिलाओं में बढ़ती बीमारियों की।

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