Priyanka Gandhi expected to do wonders for Congress in UP elections

priyankaLUCKNOW: It’s official now, Priyanka Gandhi will step out of the Gandhi family borough of Amethi and Rae Bareli to campaign for the Congress-SP alliance in Uttar Pradesh.

Congress on Tuesday released a list of 40 star campaigners for the first phase of UP polls which includes party chief Sonia Gandhi, Rahul Gandhi, former PM Manmohan Singh and Priyanka, among others.

While Priyanka’s name has featured on Congress’s list of star campaigners in the past too, notably in the 2014 Lok Sab ha polls, she has confined herself to Amethi and Rae Bareli. However, it is the first time that the party has issued a staggered list of star campaigners for the first phase, pointing to the exception it has made for Priyanka.

In earlier years, Priyanka’s name featured on the list to allow her to campaign in Amethi and Rae Bareli.

Sources confirmed there was pressure on Priyanka to step out of the family pockets for canvassing. “She is likely to move beyond her traditional role,” a senior leader said.

The formal political launch of the Gandhi scion comes soon after Congress credited her with playing a key role in stitching together the alliance with SP. It also gives credence to speculation over the likelihood of Priyanka’s electoral debut in 2019, replacing Sonia from Rae Bareli Lok Sabha seat.

Priyanka has lately been engaged in the party’s political planning like brother Rahul’s Kisan Yatra in UP last September and alliancemaking with SP.

Preliminary talks for the alliance, in fact, were conducted between Akhilesh Yadav and Priyanka at a closeddoor meeting at Ghulam Nabi Azad’s house on December 14. The two have since been in touch over phone and text messages directly and through Kannauj MP Dimple Yadav.

Priyanka’s emergence also signals Congress’s keenness to give everything it has to counter BJP, which is also throwing in its full might to win UP. While BJP is again depending on PM Narendra Modi to swing it for the saffron brigade, Congress is banking on the youthful four -Rahul, Akhilesh, Priyanka and Dimple.

यूपी में अपनी खोई सियासी जमीन वापस लेने के लिए कांग्रेस ने प्रियंका गांधी को पहली बार रायबरेली और अमेठी से बाहर के मैदान को फतह करने की जिम्‍मेदारी सौंपी है. सवाल यह है कि क्‍या प्रियंका वह कर पाएंगी जो अब तक राहुल गांधी नहीं कर पाए.

उनके साथ काम करने वाले और राजनीतिक विश्‍लेषक यह मान रहे हैं राहुल गांधी जो नहीं कर पाए वही करने के लिए तो प्रियंका को यह जिम्‍मेदारी दी गई है. अमेठी में प्रियंका गांधी के साथ काम कर चुके योगेंद्र मिश्रा कहते हैं कि वह चुनाव के दौरान औसतन 16 घंटे तक काम करती हैं. सुबह 9-10 बजे से रात को 9-10 बजे तक जनता के बीच रहती हैं. फिर दो-तीन घंटे तक पदाधिकारियों से रणनीति पर बातचीत करना नहीं भूलतीं.

मिश्रा कहते हैं कि प्रियंका गांधी जिस कार्यकर्ता से एक बार दो मिनट बात कर लें उससे साल भर बाद मिलेंगी तो भी हाल-चाल पूछ लेंगी. संगठन के लोगों से लगातार संवाद करती हैं.

रायबरेली में कांग्रेस के जिलाध्‍यक्ष वीके शुक्‍ला कहते हैं कि उन्‍होंने इंदिरा गांधी और प्रियंका गांधी दोनों के साथ काम किया है. दोनों में कई समानताएं हैं.

रैलियों की जगह रोड शो और नुक्‍कड़ सभाओं पर उनका जोर रहता है. एक दिन में औसतन 15 नुक्‍कड़ सभाएं कर देती हैं.

उन्‍हें कोई भी बात तर्क के साथ समझानी पड़ती है. उस पर वह जो निर्णय लेती हैं उसे फिर नहीं बदलतीं.

इंदिरा गांधी में भी बनावटीपन नहीं था, प्रियंका गांधी में भी नहीं है. सादगी पसंद हैं.

आमतौर पर अपने विरोधियों का नाम लेने से परहेज करती हैं. भाषणों में कभी किसी के लिए अनर्गल बात नहीं कहती हैं.

सेंटर फॉर द स्‍टडी ऑफ सोसायटी एंड पॉलिटिक्‍स के निदेशक प्रोफेसर एके वर्मा कहते हैं कि राहुल गांधी के मुकाबले प्रियंका गांधी बहुत अच्‍छी नेता हैं. वह अच्‍छी वक्‍ता हैं, उनका अच्‍छा व्‍यक्‍तित्‍व है, उनमें एक आकर्षण है. संवाद करने की अच्‍छी क्षमता है. वह गंभीर रहती हैं. इसलिए वह कांग्रेस, उसके कार्यकर्ताओं और काफी हद तक जनता की पसंद हैं.

जबकि राहुल गांधी हमेशा मसखरी करते हैं. बार-बार जुमलेबाजी और चुटकुलेबाजी की वजह से जनता उन्‍हें गंभीरता से नहीं लेती. प्रियंका गांधी उसके उलट हैं. कांग्रेस को यह चिंता सताती रही है कि प्रियंका के राजनीति में उतरने से राहुल गांधी का पत्‍ता साफ हो जाएगा. इसलिए वह लोग इन्‍हें अमेठी, रायबरेली से बाहर नहीं जाने देना चाहते थे. अब कांग्रेस डूबने लगी है तो उबारने का प्रयोग शुरू हो गया है.

वर्मा कहते हैं कि पति रॉबर्ट वाड्रा पर लगे भ्रष्टाचार के आरोप उनके सियासी सफर में सबसे बड़ी बाधा हैं. कांग्रेस भी राहुल के मुकाबले उन्‍हें ज्‍यादा नहीं बढ़ने देगी. वह भीड़ तो जुटा लेंगी लेकिन क्या उसे वोट में बदल पाएंगी, यह सवाल यूपी का चुनाव परिणाम आने तक कायम रहेगा.

इलाहाबाद यूनिवर्सिटी में राजनीति विज्ञान के प्रोफेसर एचके शर्मा कहते हैं कि एशियन पॉलिटिक्‍स में करिश्‍माई नेतृत्‍व के प्रति लोगों का पर्याप्‍त आकर्षण है. प्रियंका गांधी के साथ भी ऐसा ही है. उनकी वजह से रायबरेली, अमेठी से बाहर भी कांग्रेस को फायदा पहुंचेगा. हालांकि यह समय प्रियंका के लिए भी अग्‍निपरीक्षा का है.

बीजेपी के राष्‍ट्रीय प्रवक्‍ता संबित पात्रा कहते हैं कि राहुल गांधी के फेल होने के बाद कांग्रेस ने प्रियंका गांधी को मैदान में उतारा है. राहुल और प्रियंका दोनों पार्ट टाइम पॉलिटिशियन हैं. इस चुनाव में प्रियंका भी फेल हो जाएंगी. उनसे भाजपा को कोई नुकसान नहीं होने वाला.

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