Missing child was living as tenant, mother recognizes after several days

lostBegusarai (Bihar): Shabana Parveen’s son Raju was 5 years old when he went missing. After 7 years, Shabana struck luck when she recognized the boy living the her tenant. Auto driver Mohammad Arman,who had found Raju begging at Barauni and brought to his rented house at Begusarai.

After coming to Begusarai, Raju mostly remained outside the house to play with other children so Shabana could not see him. One day, Raju did not go out and Shabana saw her. She instantly recognized her lost son, who could not recollect the past. However, when Shabana showed photo albums and called his childhood friends, Raju also recollected the memories and recognized his mother.

अपने ही घर में किराएदार बना था 7 साल से बिछड़ा बेटा, फिल्म जैसी है ये स्टोरी

जून 2009 में शबाना परवीन नाम की महिला का पांच साल का बेटा राजू लापता हो गया।

बेगूसराय.बिहार के बेगूसराय में एक मां-बेटे के बिछड़ने और फिर उनके मिलने की दिलचस्प कहानी सामने आई है। अपने बेटे को खोज रही मां के चेहरे पर उस वक्त खुशी आ गई जब आठ साल से बिछड़ा उसका बेटा उसे मिल गया। कहानी में ट्विस्ट ये है कि महिला का बेटा उसी के घर में किराए पर रह रहा था। जानिए कैसे दोनों ने एक-दूसरे को पहचाना…

– दरअसल, जून 2009 में शबाना परवीन नाम की महिला का पांच साल का बेटा राजू लापता हो गया।

– महिला के मुताबिक, उस दौरान वो राजू को लेकर पड़ोसी के यहां एक कार्यक्रम में गई थी।

– वहां बाहर से भी कुछ लोग पहुंचे थे, भीड़ ज्यादा थी। उनके मुताबिक, इसी दौरान अचानक राजू गायब हो गया।

– उन्होंने बताया कि इसके बाद से बेटे की तलाश में वो अजमेर से लेकर हाजी दरगाह तक में दुआ मांगी।

– उन्होंने कई मंदिरों में हाथ भी जोड़े लेकिन न राजू मिला और न ही उसकी कोई खबर मिली।

ऐसे मिले बिछड़े मां-बेटे

– परवीन ने बताया कि उसके घर में एक ऑटो ड्राइवर मोहम्मद अरमान रहता है।

– 20 दिन पहले बरौनी में भटक रहे राजू ने उससे काम मांगा तो वह उसे अपने घर ले आया।

– यहां राजू अरमान के साथ रहने लगा और सुबह होते ही घर से निकल जाता फिर देर शाम घर लौटता।

– दिन में घर में मौजूद न होने के चलते परवीन उसे देख नहीं पाती थी, हालांकि उसे पता था कि अरमान के साथ एक लड़का रहता है।

– परवीन के मुताबिक, एक दिन राजू काम पर नहीं गया। दोपहर में जब वह खाना मांगने आया तो वो चौंक गई।

– उन्होंने राजू को तुरंत पहचान लिया लेकिन राजू ने उसे पहचानने से इनकार कर दिया।

– इसके बाद परवीन ने उसे फोटो एलबम दिखाया और बचपन के दोस्तों को दिखाया तब जाकर उसे याद आया और उसने भी अपनी मां को पहचान लिया।

राजू ने बताई ये स्टोरी

– राजू ने बताया कि बचपन में जब वो मां के साथ पड़ोस के कार्यक्रम में गया था तो एक कपल उसे जबरन उठाकर ले गए।

– राजू ने बताया कि उसे नशीली दवाई देकर रखा जाता था। जो उसे उठाकर ले गए थे वो पड़ोसियों को उसे अपना बेटा बताते थे।

– उसने बताया कि धीरे-धीरे वो सबकुछ भुल गया और उसने उस कपल को अपना मां-बाप मान लिया।

– करीब चार साल के बाद एक दिन राजू जब दोस्तों के बीच खेल रहा था तो किसी ने उसे बताया कि उसके मां-बाप झुठ बोलते हैं, वो उनका बेटा नहीं है।

– इसके बाद राजू वहां से भाग गया और अपने असली मां-बाप की तलाश करने लगा। उसे सिर्फ इतना याद था कि उसका घर रेलवे स्टेशन के पास है।

– राजू ने बताया कि भागने के बाद करीब तीन साल से वह बेगूसराय रेलवे स्टेशन के आसपास अपने गांव को खोजता रहा।

– इसके बाद वो बनारस, इलाहाबाद, भटनी, देवरिया सहित कई स्टेशनों के पास अपने घर की तलाश की लेकिन उसे कुछ याद नहीं आया।

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