भोपाल के अंतर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त कवि श्री मुस्लिम सलीम

Muslim Saleem reciting his ghazals at Jashn-e-Muslim Saleem at MP Urdu Academy, Bhopal on December 30, 2012.
Muslim Saleem reciting his ghazals at Jashn-e-Muslim Saleem at MP Urdu Academy, Bhopal on December 30, 2012.

  भोपालः: भोपाल के अंतर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त कवि श्री मुस्लिम सलीम इन निदो सोशल नेटवकिन्ग साइट्स तथा विष्व भर की उर्दू पत्रिकाओं, रेडियो तथा टी. वी. में छाए हुए हैं। उन्हें वह इतनी अधिक उपलब्धियां प्राप्त हो रही हैं जो बशषीर बद्र सहित भोपाल के किसी षायर को हासिल नहीं हुई हैं। मुस्लिम सलीम कभी ंअमेरिका, इंग्लैड आदि विदेषी नगरों का भ्रमण नहीं किया तब भी इन देषो की उर्दू पत्रिकाओं, रेडियो तथा टी. वी. में उनकी चर्चा होती रहती है क्यूंकि सोषल मीडिया और वेब जगत में उनकी षायरी और जीविनी पर बहुत कुछ लिखा जा चुका है।
कि मुस्लिम सलीम उर्दू के लिए इंटरनेट पर अपनी सेवाओं के कारण भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक परिचित नाम बन गया है। हाल ही में मुस्लिम सलीम को उर्दू शायरों की अंतरराष्ट्रीय निर्देशिका “निखार“ और इंडियन मुस्लिम लेजेन्ड्स में शामिल किया गया है। भारत और विदेशों के रेडियो और टी.वी. स्टेशनों ने मुस्लिम सलीम पर फ़ीचर और साक्षात्कार प्रसारित किए हैं।
दुनिया के कौने कौने से 32 शायरों ने मुस्लिम सलीम को उनकी कविता और सेवाओं पर  55 से अधिक नज़राने कविता के रूप में पेश किए हैं।
यहां हम आपको मुस्लिम सलीम की इन षानदार उपलब्धियों के बारे में बता रहे हैं

मुस्लिम सलीम की ग़ज़ल विश्वविद्यालय पाठ्यक्रम में शामिल
मुमताज़ और अंतर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त भोपाल के कवि श्री मुस्लिम सलीम की ग़ज़ल पाकिस्तान को गुजरात विश्वविद्यालय के बी. ए. सेकंड सेमेस्टर के पाठ्यक्रम में शामिल किया गया है। इस स्टदी गू्रप में 14 शायरों की कविताएं शामिल हैं जिनमें वली दक्कनी, ख़्वाजा मीर दर्द, मीर तक़ी मीर, आतष, मिर्ज़ा ग़ालिब, हाली, अल्लामा इक़बाल, हसरत मोहानी, नासिर काज़मी, फ़ैज़ अहमद फ़ैज़, मुनीर नियाज़ी, अहमद फ़राज़, मिर्ज़ा दाग़ और मुस्लिम सलीम का चयन किया गया है।
यह भोपाल और मध्य परदश के लिए एक बड़ी सफलता है। भोपाल की उर्दू दुनिया के इस कारण प्रसन्नता है कि उसके एक कवि को यह सम्मान प्राप्त हुआ है कि इसकी ग़ज़ल को एक विदेशी विश्वविद्यालय के पाठ्यक्रम में शामिल किया गया है।

महान उर्दू क़लमकारों की अंतरराष्ट्रीय डायरेक्टरी  में मुस्लिम सलीम की भागीदारी पर बधाई
महान उर्दू क़लमकारों की अंतरराष्ट्रीय डायरेक्टरी ‘‘निखार’’ में  मुस्लिम सलीम की भागीदारी पर उनको बधाई दी गई है। तथा इसे भोपाल और मध्य प्रदेष के लिए एक बड़ी उपलब्धि बताया गया है।
मुस्लिम सलीम के अलावा जिन महान उर्दू क़लमकारों को डायरेक्टरी  में जगह दी गई है उनमें हज़रत अमीर खुसरो, क़ुली क़ुतुब शाह, वली दक्कनी, मीर तक़ी मीर, मिर्ज़ा ग़ालिब, नज़ीर अकबर आबादी, ज़ौक़, बहादुर शाह ज़फर, मोमिन, दाग़, अकबर इलाहाबादी , मिर्ज़ा दबीर, मीर अनीस, इक़बाल, फ़िराक, जिगर, फैज़, सरदार जाफ़री, जांनिसार अख्तर, शकील बदायूनी, कैफ़ी आज़मी, मजरूह, खुमार, साहिर लुधियानवी, अहमद फराज, इब्ने इंशा, गुलज़ार, बशीर बद्र, निदा फाज़ली, महबूब राही, मुजफ्फ़र हनफी, जावेद अख्तर, मिदहत उल अखतर, राहत इंदौरी, मुनव्वर राना, परवीन शाकिर और मुज्तबा हुसैन के नाम शामिल हैं।
मुस्लिम सलीम की चर्चा पेज 84 पर है जहां अंग्रेजी में उनका परिचय और कलाम देवनागरी में दिया गया है। अंतरराष्ट्रीय डायरेक्टरी ‘‘निखार’’ नागपुर के अग्रणी कलमकार अजहर बख्श अजहर के प्रयासों का सुफल है। महान उर्दू क़लमकारों की अंतरराष्ट्रीय डायरेक्टरी  के साथ साथ यह उर्दू-हिन्दी आसान शब्दकोश भी है

इंडियन मुस्लिम लेजंेड्स
इसके अलावा वेबसाइट  इंडियन मुस्लिम लेजंेड्स में भी मुस्लिम सलीम को पृष्ठ 436 पर शामिल किया गया है। इस डायरेक्टरी  में हर क्षेत्र की महान मुस्लिम शखेसयात शामिल की गई है।

ईमान एफएम रेडियो ब्रिटेन और डीडी उर्दू पर लाइव साक्षात्कार
ईमान एफएम रेडियो ब्रिटेन पर एक की घंटे का लाइव साक्षात्कार प्रसारित हुआ जो मोबाइल फोन के माध्यम से एनकर सुश्री कौसर शाह ने लिया। इसी तरह डीडी उर्दू पर मुस्लिम सलीम के काव्य, जीविनि और विचारों पर आधे घंटे का कार्यक्रम प्रसारित हुआ।

दुनिया के 32 शायरों ने मुस्लिम सलीम के लिए 55 क़सीदे लिखे
फेसबुक पर दुनिया के कौ कौने से 32 शायरों ने मुस्लिम सलीम के काव्य और सेवाओं पर 55 से अधिक क़सीदे पेश किए हैं जिनमें श्री तनवीर फूल (न्यूयार्क
), उवैस जाफ़री वाशिंगटन, फैसल नवाज़ (लंदन), डा. अहमद अली बर्क़ी आज़मी, दिल्ली, नदीम अख़्तर नदीम माँगनावी, लंदन, इंग्लैंड, अहमद अली खां (रियाज़, सऊदी अरब) तारिक़ मुहिउद्दीन, पटना, बिहार, इंडिया, मुहम्मद सिब्ग़तुल्लाह आरिफ़ी (मम्बई) सलमान सादिक़ सियालकोट, पाकिस्तान, ज़िया  शहज़ाद (कराची), कामिल जनीटवी, चन्दोसी इंडिया, नासिर फिरोजाबाद, ज़िया  शादानी, मुरादाबाद, इस्माईल नज़र, इलाहाबाद विश्वविद्यालय, शौक अंसारी, पाकिस्तान, जरीना खां, रामपुर, जहीना सिद्दीकी, दिल्ली, हारिस बिलाल, सरगोधा, पाकिस्तान, मजीद ताज बलोच , बलूचिस्तान, पाकिस्तान, अव्वल संग्रामपुरीे, जेद्दा, सऊदी अरब, इक़बाल कुरैशी, हज़रो, पंजाब, पाकिस्तान, बाबर शाह रहमान, मियांवाली, पाकिस्तान, बाबर इमाम, फलिया, पाकिस्तान, खुर्शीद हसन नैयर (सऊदी अरब) मोहम्मद अलीम अल्लाह खान वक़ार (सहारनपुर, उत्तर परदेश), सऊद सिद्दीकी, कराची, प्रोफेसर ज़िया रोमानी, कर्नाटक आदि शामिल हैं।

इंडो-कुवैत फ्रेंडशिप सोसाइटी ने मुस्लिम सलीम को संरक्षक नियुक्त किया
इनहीं सेवाओं व विशेषताओं के फलस्वरूप इंडो-कुवैत फ्रेंडशिप सोसाइटी ने मुस्लिम सलीम को संरक्षक नियुक्त किया है जिसके उन्य संरक्षों में श्रीमति किरण बेदी, गुजरात के भूतपूव पुलिस महानिदेशक श्री श्रीकुमार) केरल के भूतपूव मंत्री श्री एम के मुनीर) विश्वविख्यात तबला-वादक कु रिम्पा शिवा व अन्य प्रख्यात व्यक्ति भी शामिल हैं।

उर्दू क़लमकारों की आनलाइन डायरेक्टरीज़
मुस्लिम सलीम ने उर्दू कवि ंऔर लेखकों की 27 शहरों और 4 देशों की अनलाइन डायरेक्टरीज़ बनाई हैं। इस क्षेत्र में सबसे पहला काम मुस्लिम सलीम का ही है। रेख़्ता तथा अन्य डायरेक्टरी बहुत बाद में अस्तित्व में आईं और उनमें भी मुस्लिम सलीम की डायरेक्टरी  से भरपूर फायदा उठायं गया। कई शोध विद्वानों ने अपना शोध कार्य मुस्लिम सलीम की डायरेक्टरी  की मदद से किया है। यह उर्दू दुनिया में एक दुर्लभ उपलब्धि है।

डा. शहज़ाद रिज़वी, वाशिंग्टन द्वारा मुस्लिम सलीम की ग़जलों का अनुवाद

डा. शहज़ाद रिज़वी, वाशिंग्टन का संबंध मध्य प्रदेश से है जो भोपाल के हमीदिया कालेज और सीहोर में लेक्चरर थे तथा अब वाशिंग्टन में हैं। वह अंग्रेज़ी और उर्दू के प्रख्यात लेखक है। डा. शहज़ाद रिज़वी, वाशिंग्टन द्वारा मुस्लिम सलीम की 7 ग़जलों का अंग्रेज़ी में अनुवाद किया गया है।

जीवन परिचय तथा कैरियर
मूल नाम और उपनाम मुस्लिम सलीम है।

अभिभवक
मुस्लिम सलीम के पिता डा. सलीम वाहिद सलीम अपने समय के विख्यात शायर थे और विश्वसनीय पत्रिकाओं में 1942 से 1970 तक बहुतायत और नियमित रूप से प्रकाशित होते रहे। मां सुश्री उम्मे हबीबा साहिबा सैयद अब्दुल बाक़ी साहब पौत्री थीं जो  मोहम्मदन एंेग्लो- ओरईन्टल कालेज (अब अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवार्सिटी) के पहले पांच छात्रों मैं शामिल थे ।

जन्म और शिक्षा
मुस्लिम सलीम का जन्म जिला हरदोई के कस्बा शाहबाद में 1 नवंबर 1950 हुआ। बचपन से लेकर बी.ए. आनर्स की शिक्षा तक का समय अलीगढ़ ही में बीता। अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवसर््िटी से हाई स्कूल और बी ए आनर्स करने के बाद इलाहाबाद यूनिवसर््िटी से एम.ए. (अरबी) पास किया।

कैरियर
1979 में भास्कर ग्रुप ़ के उर्दू अखबार आफ़ताब जदीद भोपाल से कैरियर शुरू किया। 1986 में इसी समूह के अंग्रेज़ी अखबार नेशनल मेल से जुड़ाव हुआ। 2002 में भास्कर हिंदी में न्यूज़ कोआर्डीनेटर बने। 2003 में अंग्रेज़ी अखबार न्यूज एक्सप्रेस में चीफ़ सब एडीेटर का पद संभाला। 2004 से 2008 तक अंग्रेज़ी अखबार सेंट्ररल क््रेिनकल में ब्योरो चीफ, 2008 से 2012 तक अंग्रेज़ी अख़्बार दिन्दुस्तान टाइम्स और 2016 तक मध्य प्रदेश जनसंपर्क संचालनालय में अनुवादक रहे।

पाठ्यक्रम में शामिल ग़ज़ल
जब हमने जिन्दगी की गिनीं राहतें तमाम
लम्हात में सिमट सी गईं मुद्दतें तमाम
वह देखने में अब भी तनावर दरख़्त है
हालांकि वक़्द खोद चुका है जड़ें तमाम
हर बार यंू लगा कि कोई आएगा मगर
कुछ दूर ही से लौट गई आहटें तमाम
मैं और एहतिजाज की हिम्मत नहीं नहीं!
ब्ेाइख्तियार चेख पड़ी हैं रगें तमाम
वह खुद यह चाहता था महसूस तब हुआ
हम बेखुदी में तोड़ गए जब हदें तमाम
आसार-ए-कर्ब सबसे छुपाता फिरा मगर
बिस्तर पे नक़्श हो ही गईं करवटें तमाम

अन्य ग़ज़लें
जब भी जज्.बों के लिए अल्फाज़ नश्तर हो गए
कैसे कैसे फूल जैसे हाथ खंजर हो गए
देव-क़ामत वे शजर जब तेज़ आंधी में गिरा
पस्ता-क़द जितने थे पौधे सबसे कदावर हो गए
धीरे-धीरे हम जीने का हुनर आ ही गया
पत्थरों में रहते रहते हम भी पत्थर हो गए
आ पड़े जिस दिन से हम दरिया-ए-जद्द-ओ-जह्द में
इस तरह से जां पे बन आई शिनावर हो गए
नीम-फाक़ा नीम-उर्यानी को अंदर छोड़कर
घर से बाहर जब कदम रक्खा सिकन्दर हो गए
पैकर-ए-तरग़ीब थे सारे खिलौने दूर से
छू लिया हमने तो सब यकलख़्त पत्थर हो गए
आलम-ए-तख़्ईल में मुस्लिम हुआ किसका गुज़र
म्ेारी यादो के कई लम्हे मुअत्तर हो गए

बहुत ही कीमती सामान हो गया चोरी
हमारे सीने से इंसान हो गया चोरी
सुकून पाने की ख़ातिर किए थे समझौते
बहुत सुकून से ईमान हो गया चोरी
मिटे असासे तो कुछ ग़म नहीं, अलम है
हमारी फ़त्ह की इमकान हो गया चोरी
बिठाया पहरे पे मुस्लिम जहां भरोसे से
खुद उस मकान का दरबान हो गया चोरी

जिंदगी की तरह बिखर जाएंगे
क्यों हम एैसे जिएं कि मर जाएं
कर दी मीरास वारिसों के सिपुर्द
जिं़दगी किसके नाम कर जाएंगे
घर की लपटें बहुत ग़नीमत हैं
हर तरफ़ आग है किधर जाएं
मोड़ लगने लगे हर इक मंज़िल
और हर मोड़ से गुज़र जाएं
दब गया हूँ में जिन में तह दर तह
यह जो परतें हैं सब उतर जाएं

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