Doctor hangs self to death after writing to lady doctor wife

suicideMandsaur (MP) A doctor whose wife is a lady doctor committed suicide by writing a suicide note to her. Doctor Kishore Patidar (35) was posted at government hospital at Kotra Bahadur Sitamau in Mandsaur district while wife Monika works at Jhalawar (Rajasthan) hospital. They were married 5 years ago and were living separately for last 3 years.

His wife and son (3) had come to him 5 days ago. There were dispute between them on living together after which the doctor took this extreme step.

पत्नी के लिए Watsapp पर ये वर्ड लिख डॉक्टर ने लगाई फांसी, पढ़ें क्या लिखा

मंदसौर/सीतामऊ।सीतामऊ स्वास्थ्य केंद्र के सरकारी डॉक्टर ने पत्नी से विवाद के बाद सोशल मीडिया पर सुसाइड नोट अपलोड कर फांसी लगा ली। 5 दिन पहले पत्नी झालावाड़ से आई थी। तब साथ रहने को लेकर दाेनों में विवाद हुआ था। पति-पत्नी 3 साल से एक-दूसरे से अलग रह रहे थे। क्या लिखा सुसाइड नोट में…

– डॉ. किशोर (35) पिता राम पाटीदार निवासी कोटड़ा बहादुर सीतामऊ के सरकारी अस्पताल में पदस्थ थे।

– वे यहां अकेले रहते थे। परिवार कोटड़ा बहादुर में ही रहता है। पत्नी मोनिका (30) राजस्थान के झालावाड़ में मेडिकल कॉलेज में जाॅब करती हैं व बेटे नयन (3) के साथ वहीं रहती हैं।

– इनकी शादी पांच साल पहले हुई थी। रात 12 बजे डॉ. किशोर ने सहयोगी डॉ. विजय सुरा व अन्य मित्रों के वाट्सएप पर एक सुसाइड नोट अपलोड किया।

– कुछ देर बाद डॉ. सुरा ने स्वास्थ्य केंद्र में इमरजेंसी ड्रेसर मनीष सांखला व चौकीदार नरेंद्र बागरिया को सूचना देकर डॉ. किशोर के घर बुलाया। यहां दरवाजा बंद था।

– खिड़की खोलकर देखा तो डॉ. किशोर पत्नी की लाल रंग की साड़ी से बने फंदे पर लटके थे। पुलिस ने बॉडी को उतारा।

– कमरे से सुसाइड नोट के अलावा शराब की बोतलें भी मिलीं। पुलिस की सूचना पर डॉ. किशोर के छोटे भाई विष्णु व परिवार के अन्य सदस्य पहुंचे।

– सुसाइड नोट में लिखा ‘मैं स्वयं मेरी इच्छा से आत्महत्या कर रहा हूं, इसमें किसी की कोई गलती नहीं है।

– मोनिका तुम खुश रहना, नयन को भी खुश रखना और अपनी नौकरी करके खुशी-खुशी बहुत सारे पैसे जमा करना।

– मैं अकेला नहीं रह पाया, इसलिए आत्महत्या कर रहा हूं। इसमें तुम्हारा कोई दोष नहीं।

– जान देने से तकलीफ तो होगी पर अकेलेपन से ज्यादा नहीं।

– मैं पूरे होशोहवास में यह लिख रहा हूं और पुलिस से निवेदन है कि किसी को परेशान न किया जाए। – डॉ. किशोर पाटीदार, सीतामऊ 8 मार्च 2017, समय रात 11.35

 

अकेलापन नहीं सह पाए भइया

– डॉ. किशोर के छोटे भाई विष्णु ने बताया कि 5 दिन पहले भाभी झालावाड़ से आई थी।

– तब साथ में ना रहने की बात पर उन्होंने भैया से विवाद किया था।

– भैया चाहते थे कि परिवार साथ में रहे, वे बेटे नयन को बहुत प्यार करते थे। दूसरे दिन चली गई थी।

– भाभी साल में केवल 1 या 2 बार ही यहां आती थी, भैया अकेलेपन में तनाव महसूस करते थे।

– इसी कारण व अकसर चुप रहा करते थे, पिछले दिनों से ज्यादा बातचीत भी नहीं कर रहे थे। उनकी आत्महत्या की केवल यही एक कारण है।

– सीतामऊ पुलिस के सब इंस्पेक्टर आजाद मोहम्मद खान ने बताया सभी पहलुओं को लेकर जांच कर रहे हैं। सुसाइड नोट के आधार पर एक-दो दिन में परिजन के बयान लेंगे।

सालभर पहले फांसी के साथ सेल्फी ली थी, इस बार सच में लगा ली

– डॉ. पाटीदार ने सालभर पहले फांसी के साथ सेल्फी ली थी। इसे उन्होंने वाट्सएप प्रोफाइल में लगाया था। कई परिचितों ने भी देखा।

– इसे सरकारी डॉक्टर की अनुशासनहीनता मानते हुए तत्कालीन सीएमएचओ डॉ. एके मेहता ने उन्हें नोटिस भी दिया था। हालांकि वह केवल सेल्फी थी लेकिन इस बार डॉ. पाटीदार ने सच में फांसी लगा ली।

‘हताशा के वक्त ज्यादा जिम्मेदारी’

व्यक्ति अगर डिप्रेशन में दिखाई पड़े तो उस वक्त परिजन पर ज्यादा जिम्मेदारी रहती है। उसके व्यवहार को देखकर चर्चा कर उस स्थिति से बाहर निकालना चाहिए। अकेलापन महसूस ना होने दें। हर चीज का हल निकल सकता है। शुरुआत से जिद की आदत ना डालें। तनाव या अकेलापन महसूस ना होने दें। डॉ. अनिल नकुम, मनोचिकित्सक जिला अस्पताल

 

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