Narmada river to be assumed as living being in Madhya Pradesh, polluters will be punished

narmadaMadhya Pradesh Chief Minister Shivraj Singh Chouhan has announced that from now onwards, Narmada river will be assumed as living being in Madhya Pradesh. Those who harm or pollute it will be punished, he added. He announced this during of “Namami Devi Narmade” – Seva Yatra on Monday.

Meanwhile, the echo of “Namami Devi Narmade” – Seva Yatra is reaching not only the corners of the country, but also to 178 countries. The world’s environment, fauna, gou-vansh, soil, agriculture, water scientists are supporting the Narmada Yatra. The Yatra which is a confluence of seers, society and government, is leaving an imprint with its objectives of tree plantation on the banks of the Narmada, cleanliness, de-addiction, Beti-Bachao, river-cattle conservation, female foeticide and organic farming. President of Rajya Gou Palan and Pashu Samvardhan Board and member of Rajya Narmada Seva Samiti Mahamandleshwar Swami Akhileshwaranand Giri said this at a Jan-Samvad during the Seva Yatra at Tindni village in Mandla district.

Smt. Gyarasi Devi carrying a kalash and District Panchayat Vice-President Shri Shailesh Mishra with the Narmada Dhwaj accompanied by women and girls in large number with kalash on their heads welcomed the Yatra on its reaching Tindni from Gwari village. Today is the 127th day of the Yatra which started on December 11, 2016.

Narmada – lifeline of not only humans but also rivers

Swami Akhileshwaranand Giri said that Maa Narmada is today reviving rivers also besides providing electricity, food grain and water. Narmada which has been providing drinking water to crores of people in Gujarat and Madhya Pradesh and electricity to farmers for irrigation and industries, is now reviving rivers like Kshipra, Gambhir, Parvati, Khan, Sabarmati etc. Maharishi Ved Vyas writes in the Narmada Puran that many rivers will lose their identity in Kalyug and the Narmada will bring them back to life.

Narmada is more ancient than Ganga

Swami Akhileshwaranand Giri said that the Ganga came into being in Treta Yuga and the Narmada made its appearance in Satyuga. According to Narayan’s boon, all holy spots including the Ganga wash the blemishes from the sins of sinners who take dip in them at the Narmada. Therefore, Narmada Parikrama is like visiting all the teerths. Once a year, Ganga herself comes to take a bath in the Narmada and returns pure and bright. Like the Ganga, the water of Narmada is also full of medicinal qualities.

 

 

अब नर्मदा भी होगी जीवित नदी, नुकसान पहुंचाया तो लगेगा इंसानों वाला एक्ट

नर्मदा को देश की प्राचीन और पवित्र नदी माना जाता है। -फाइल

भोपाल.गंगा के बाद अब नर्मदा को देश की दूसरी जीवित नदी (living entity) का दर्जा मिलेगा। यानी नर्मदा को भी इंसानों जैसे अधिकार होंगे। मध्य प्रदेश के सीएम शिवराज सिंह चौहान ने सोमवार को नर्मदा सेवा यात्रा में इसका एलान किया। इसके मुताबिक, अगर कोई इंसान नदी को पॉल्यूटेड करता है तो उसके खिलाफ इंसानों को नुकसान पहुंचाने जैसी कार्रवाई होगी। देश की दोनों नदियों से पहले न्यूजीलैंड की संसद भी वहां की एक नदी को ये दर्जा दे चुकी है। नर्मदा के साथ जिंदगी सूख जाएगी…

– शिवराज ने कहा, ”नर्मदा मैया के तट पर कहता हूं कि हम नर्मदा को जीवित ईकाई मानेंगे। आइए संकल्प लें कि हम मैया को प्रदूषित नहीं होने देंगे। ऐसा करने वालों के खिलाफ इंसानों को नुकसान पहुंचाने जैसा अपराध माना जाएगा। अगर नर्मदा सूख गई, तो हमारी ज़िंदगी सूख जाएगी।”

– मंडला में सेवा यात्रा के 127वें दिन होम मिनिस्टर राजनाथ सिंह भी शामिल हुए। उन्होंने कहा, ”हम नदियों को मां मानते हैं। जल-जीव-जलाशय सबको बचाना हमारा कर्तव्य है। नर्मदा यात्रा इस दिशा में मील का पत्थर साबित होगी। 2020 तक नदियों को साफ करना हमारा टारगेट है।”

– स्वामी अखिलेश्वरानंद गिरी ने कहा, ”गंगा का अवतरण त्रेता युग और नर्मदा का अविर्भाव सतयुग में हुआ। नर्मदा परिक्रमा में सभी तीर्थों का फल मिलता है। साल में एक बार गंगा खुद नर्मदा में स्नान के लिए आती है। गंगा की तरह नर्मदा जल भी औषधीय गुणों से भरपूर है।”

गंगा देश की पहली जीवित नदी

– पिछले महीने ही उत्तराखंड हाईकोर्ट ने कहा था- ”गंगा नदी देश की पहली जीवित नदी (living entity) है और इसे वे सारे हक मिलने चाहिए जो किसी इंसान को मिलते हैं। गंगा को धर्मग्रंथों में सबसे पवित्र नदी का दर्जा दिया गया है। इसलिए हम इसे जिंदा नदी के तौर पर देख रहे हैं।”

– हाईकोर्ट के फैसले के मायने ये हुए कि अगर कोई गंगा को पॉल्यूटेड करता है, तो उस पर उसी हिसाब से कार्रवाई की जाएगी, जो किसी इंसान को नुकसान पहुंचाने पर की जाती है।

– दुनिया में किसी नदी को ऐसा दर्जा दिए जाने का पहला मामला न्यूजीलैंड में सामने आया। वहां की संसद ने नदी को ऐसा दर्जा दिया था।

दुनिया में और कहां हुई इस तरह की कोशिशें

1) न्यूजीलैंड

-न्यूजीलैंड की पार्लियामेंट ने भी देश की हेंगनुई नदी को बचाने के लिए उसे living entity का दर्जा दिया है। यह नदी 145 किलोमीटर लंबी है। हेंगनुई नदी living entity का दर्जा पाने वाली दुनिया की पहली नदी थी।

2) इक्वाडोर

-यह ऐसा पहला देश था जहां के संविधान में राइट्स ऑफ नेचर को शामिल किया गया था। सितंबर 2008 में संविधान में इसे शामिल करने के लिए वहां रेफरेंडम भी कराया गया था।

3) भारत

-उत्तराखंड हाईकोर्ट ने गंगा को जीवित नदी करार दिया है। पिछली सुनवाई में इसी कोर्ट ने गंगा किनारे 150 कमर्शियल इस्टैब्लिशमेंट बंद करने को कहा था। नदी के 500 मीटर के दायरे में यूरिनेट करने वाले या गंदगी फैलाने पर 5000 रुपए जुर्माना लगाने को भी कहा था।

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