150 pins found in man’s body mysteriously, 92 removed by doctors

pinmanIn April this year, Badrilal Meena’s CT scans showed there were 75 pins embedded in his body. Six hospitals, four months and one surgery later the number of pins increased to 150 and Meena has no idea how.
The man, who is from Barda Village in Kota, underwent two surgeries last week at Asian Institute of Medical Sciences (AIMS) in Faridabad where around 100 pins were removed. Surgeons, however, suspect that Badrilal suffers from mental illness and had been piercing the pins into his body himself.
“I do not know how the pins got in there,” said Badrilal. Even his son and wife claim they don’t know when and how the pins got there. Doctors now say he will undergo psychiatric evaluation after recovery if he agrees to it.
Badrilal’s curious case was first detected at a private hospital in Kota where he had gone complaining of foot ache and diabetes. He has visited six hospitals since and lost over 30kgs.
Doctors say he arrived at the Asian Institute of Medical Sciences (AIMS) in Faridabad last fortnight complaining of breathlessness and throat pain. In the CT scan before the surgery, Badrilal’s neck looked like a pin-cushion. He had more than 150 pins in his throat, elbows, abdomen and ankles. 10 of these were piercing his windpipe, three going through his food pipe, one in the vocal cord and two cutting through his carotid artery — the main artery that supplies blood to the brain. Surgeries were performed on June 29 and July 2 to remove pins from his neck and abdomen.
Earlier, seven pins had been extracted from his neck and four from the upper and lower limbs at the Northern Railway Central Hospital in Delhi. He was further referred to Dr Ram Manohar Lohia Hospital, psychiatry department. “We wanted to admit him for psychiatric evaluation. He kept denying there was any problem and refused to be admitted,” said Dr Smita Deshpande, head of the department at Dr Ram Manohar Lohia Hospital.
“I cannot give a diagnosis, but he might be delusional and psychotic. He could have inserted the pins because he imagined he was following commands of the voices in his head. We have had cases where people have killed others, cut off their testicles or harmed themselves because a voice told them to do so. Or it could be because he wanted to inflict self-harm,” she said.
Dr Deshpande added that Badrilal needs help for the underlying cause or the condition could surface again.
पिनमैन के नाम से मशहूर हैं ये शख्स, 6 घंटे की सर्जरी में गले से निकली 92 पिन
फरीदाबाद (हरियाणा). पिनमैनके नाम से मशहूर 56 साल के बद्रीलाल मीणा को डॉक्टरों ने नई जिंदगी दी है। बद्री के शरीर के अंदर एक-दो नहीं, बल्कि 150 से ज्यादा पिन, निडिल और कील धंसी हुई थी। कुछ में तो जंग भी लग चुका था। शुक्रवार को फरीदाबाद के एशियन अस्पताल में बद्री की सर्जरी हुई। 6 घंटे तक चली सर्जरी में डॉक्टरों ने बद्री के गले से 92 पिनों को निकाला। शरीर के बाकी हिस्सों में धंसी पिनों को बाद में निकाला जाएगा। डॉक्टरों के मुताबिक सर्जरी जोखिम भरी थी, क्योंकि मरीज की जान जा सकती थी। फिलहाल बद्री स्वस्थ हैं। सर्जरी के लिए तैयार नहीं था कोई डॉक्टर….

– राजस्थान में बूंदी के रहने वाले बद्रीलाल रेलवे में पानी सप्लाई का काम करते थे। वह 6 महीने से इलाज के लिए देश के कई अस्पतालों में चक्कर लगा रहे थे, लेकिन कोई भी डॉक्टर सर्जरी के लिए तैयार नहीं हो रहा था। इससे उनकी सेहत काफी बिगड़ गई थी और करीब 30 किलो वजन भी कम हो गया।
– बद्री कहते हैं ‘मेरे शरीर में ये पिनें कहां से आईं, मुझे कोई जानकारी नहीं है। मुझे डायबिटीज थी, इसके चलते साल भर पहले मैंने डॉक्टर को दिखाया तो जांच में पता चला कि शरीर में पिनें धंसी हुई हैं। फिर मैं इलाज के लिए राजस्थान, दिल्ली और मुंबई के कई अस्पतालों में गया, पर सभी जगह डाक्टरों ने सर्जरी से इंकार कर दिया। इसके बाद मैं एशियन हॉस्पिटल आया।’ बद्री को एशियन हॉस्पिटल में 24 जून को भर्ती किया गया।
– सीटी स्कैन और एंडोस्कोपी में पता चला कि उनके शरीर के अलग-अलग अंगों में 150 से भी अधिक पिनें धंसी हैं।
– ईएनटी विभाग के डायरेक्टर डॉ. ललित मोहन पाराशर कहते हैं ‘इतनी पिनें और कीलें देखकर हम हैरान थे। हमारे सामने चुनौती थी कि किस तरह उन्हें निकालें। क्योंकि कुछ पिनें उनके सांस नली, खाने की नली, ईसोफेगस, दिमाग को खून पहुंचाने वाली मुख्य धमनी (कैरोटिड आर्टरी) में धंसी हुईं थी।’
मानसिक बीमार करते हैं ये हरकतें
– डॉ. मीनाक्षी मनचंदा के मुताबिक मरीज की केस हिस्ट्री में पता चला है कि उसका मानसिक बीामारी का भी इलाज चल रहा है। डिप्रेशन और मानसिक कमजोरी की स्थिति में मरीज खुद को चोट पहुंचाते है। उन्हें खुद भी इसकी जानकारी नहीं होती।’
– अस्पताल के चेयरमैन डॉ. एनके पांडे के अनुसार भारत में यह पहली सर्जरी है। इसे हम लिम्का बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज कराने की तैयारी कर रहे हैं।

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