Entire population mourns monkey’s death, takes out funeral procession

monkeyIndore: A pall of gloom fell on Jawad town in Neemuch district of Madhya Pradesh over the death of a monkey they loved very much.. When the funeral processions was taken out entire villagers broke into tears with arrival of first body.

Grief stricken people assembled in large numbers to pay tributes to the deceased. Administration erected tent and made other facilities for people as more than 8,000 people from village and adjoining areas gathered there to pay their last respect. As mark of respect, whole market remained closed for the day.

बंदर की मौत पर रो पड़ा पूरा गांव, फिर शवयात्रा निकाल किया अंतिम संस्कार

इंदौर। एमपी के एक गांव में लोग बंदरों को अपने परिवार का सदस्य मानते हैं। नीमच के जावद में किसी बंदर की मौत होने पर गांव के लोग मिलकर उसकी अंतिम यात्रा निकालते हैं और उसका अंतिम संस्कार उसी तरह से करते हैं, जैसे किसी बुजुर्ग की मृत्यु हुई हो। ये परंपरा पिछले कई सालों से चली आ रही है। गांव में या आसपास के क्षेत्र में किसी भी बंदर की मौत होने पर यही तरीका अपनाया जाता है।

– जावद के आदर्श मोहल्ले में पिछले दिनों एक बंदर की मौत हो गई। वानरराज की मौत की खबर फैलते ही जावद के कई क्षेत्रों से लोग एकत्रित हो गए और रोने लगे। फिर विधि-विधान से उसकी मृत देह को स्नान करवाया गया, फिर उसके सिर पर गुलाल लगा कर शरीर पर केसरिया बाना लपेटा गया और गुलाल उड़ाई गई। जैसे ही अर्थी सजाई जाने लगी गांव के लोग और महिलाएं रोने लगीं। श्मशान घाट के रास्ते में लोगों ने अर्थी पर फूल बरसाए।

– गाजे-बाजे ढोल धमाके के बीच बजरंग बली के जयकारों के साथ उसकी अंतिम यात्रा निकाली गई, अंतिम यात्रा में लगभग पूरे मोहल्ले वासी शामिल थे। महिलाओं ने उसके मृत शरीर पर नारियल और रुपए चढ़ाए। इसमें गांव के कई लोग शामिल हुए। यात्रा जहां-जहां से निकली वहां लोगों ने नारियल और रुपए चढ़ाकर उसे श्रद्धांजलि दी।

– गांव के कई हिस्सों में घूमते हुए अंतिम यात्रा मुक्तिधाम पहुंची। मुक्तिधाम में लोगों ने पहले हिन्दू परंपरा के अनुसार पूजा करवाने के बाद उसकी चिता सजाई। फिर मंत्रोच्चार के बीच मुखाग्नि देकर उसका अंतिम संस्कार किया गया।

– अंतिम यात्रा में लगे दिलीप मेघवाल ने बताया कि यह बंदर आदर्श मोहल्ले के माताजी के मंदिर के पेड़ पर रहता था। मंदिर आने वाले लोग माताजी को प्रसाद चढाने के बाद इसका हिस्सा पेड़ के नीचे रख देते थे कुछ लोग तो इसे अपने हाथ से चने खिलाते थे। इसलिए ये सभी का लाड़ला था। इसने कभी किसी को नुकसान नहीं पहुंचाया।

– गांव के बुजुर्ग नारायण सिंह ने बताया कि जावद में हम लोग बंदरों को बजरंग बलि का अवतार मानते हैं। हम लोग बंदरों का ध्यान परिवार के सदस्य की तरह रखते हैं। इसलिए किसी की मौत होने पर उसका अंतिम संस्कार भी रीति रिवाज के साथ किया जाता है। जून 2016 में विक्रम नगर में एक बन्दर की मृत्यु हुई थी, तब उसका अंतिम संस्कार भी इसी तरह किया गया था। उसे गांव के मंदिर के पुजारी ने मुखाग्नि दी थी।

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