There is a Mini America in Saudi Arabia, women can enjoy semi nude on beach

Mini AmericaThis city is a part of Saudi Arabia but opposing the whole country here women can wear according to themselves, can drive a car, can even wear a bikini on the sea beach and can do anything they want. This place is called Saudi Aramco. This place was specially designed for Americans, therefore, its way of living is as similar as them.
Ayesha Malik of Pakistani origin is born and brought up here. She has an American passport currently. She is a photographer by profession and released a book containing pictures of this beautiful city featuring its exceptionally different life from whole Saudi Arabia. The title of the book is, Aramco: Above the Oil Fields.
Saudi Aramco is a Gated Community. It is also called as Dhahran. It is situated within 58 sq km. It includes a private beach where only people from Aramco and their guests are allowed to visit. The lifestyle of this city is as same as American culture. This city was set up in 1930 for Americans.
Actually, when petroleum was founded in Saudi Arabia, it was an American company named Standard Oil of California which drilled it first. Its engineers and workers were from America and their lifestyle was completely different from the Arabs. That is why the government of that time designed this city according to them so that they can get a feel of America. Firstly it was operated by an American company but later in 1980 it was hand over to the Saudi government and the name of the company from Standard Oil of California changed to Saudi Arabian Oil Company.
In this company, there are workers from different countries. So it has a kind of mixed culture. You can see a golf court, gym, hospital, American School established for the people of Aramco here. Here people celebrate Christmas like the western countries
सऊदी अरब के भीतर है एक मिनी अमेरिका, इतनी अलग है वहां की Life
यह सऊदी अरब का हिस्सा है, लेकिन यहां महिलाएं जैसी मर्जी वैसे कपड़े पहन सकती हैं, बाइक चला सकती हैं।
यह शहर सऊदी अरब का ही हिस्सा है। लेकिन बाकी देश के उलट, यहां महिलाएं जैसी मर्जी वैसे कपड़े पहन सकती हैं, गाड़ी चला सकती हैं, आधे कपड़ों में समुद्र तट पर लेट सकती हैं और जो चाहे वो कर सकती हैं। सऊदी अराम्को (Saudi Aramco) में आपका स्वागत है। यह उपनगर खासतौर पर अमेरिकियों के लिए ही बसाया गया है, इसलिए इसके तौर-तरीके किसी आम अमेरिकी शहर की तरह ही हैं।ऐसी है यहां लाइफ…
-पाकिस्तानी मूल की आएशा मलिक इसी अराम्को में जन्मी और पली-बढ़ी हैं। उनके पास फिलहाल अमेरिकी पासपोर्ट है। पेशे से फोटोग्राफर आएशा ने अराम्को को लेकर तस्वीरों वाली किताब तैयार की है। इसका टाइटिल है- ‘अराम्को : अबव द ऑयल फील्ड्स।’
-सऊदी अराम्को एक गेटेड कम्युनिटी है। इसे दहरन भी कहा जाता है।यह 58 वर्गकिलोमीटर में फैला है। इसमें एक प्रायवेट समुद्र तट (बीच) भी है, जहां सिर्फ अराम्को में रहने वाले लोग और उनके गेस्ट ही जा सकते हैं।
-यहां की लाइफस्टाइल कमोबेश अमेरिका जैसी ही है। 1930 के दशक में इस उपनगर को अमेरिकियों के लिए बसाया गया था।
-दरअसल, जब सऊदी अरब में पेट्रोलियम की खोज हुई, तो उसे निकालने की शुरुआत स्टैंडर्ड ऑयल ऑफ कैलिफोर्निया नामक अमेरिकी कंपनी ने की थी। उसके इंजीनियर और कई कर्मचारी अमेरिकी थे। उनकी लाइफस्टाइल सऊदी अरब के बिल्कुल विपरीत थी। इसलिए, उन अमेरिकियों को घर जैसा अहसास कराने के लिए कंपनी और सऊदी सरकार के सहयोग से यह उपनगर बसाया गया।
-पहले इसका संचालन अमेरिकी कंपनी ही करती थी, लेकिन फिर सऊदी सरकार ने इसे अपने हाथ में ले लिया है। स्टैंडर्ड ऑयल ऑफ अमेरिका ने 1980 के दशक में अपना नाम बदलकर सऊदी अरेबियन ऑयल कंपनी या सऊदी अराम्को कर लिया था।
-यहां अराम्को कंपनी में काम करने वाले अमेरिकियों के साथ-साथ उसके सऊदी और अन्य देशों के कर्मचारी भी रहते हैं। इसलिए यहां मिलाजुला कल्चर नजर आता है। यहां रहने वालों के लिए गोल्फ कोर्ट, जिम, हॉस्पिटल, अमेरिकन स्कूल जैसी तमाम सुविधाएं उपलब्ध हैं। यहां क्रिसमस पश्चिमी देशों की तरह धूमधाम से मनाया जाता है।

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