Muslim youths save lives in Muzaffarnagar train accident, Hindu saints praise them

trainMuzaffarnagar: Rising above religion, hundreds of Muslim youths of nearby village Ahmad Nagar rushed to train accident site and saved scores of people. They also rescued Hindu religious leaders from train bogeys. Praising the Muslim youths, Hindu saints said that it was impossibile to survive, had these Muslim youths not lent timely help.
Meanwhile, at least 23 passengers were killed and over 60 injured when 14 coaches of the Puri-Haridwar Utkal Express jumped the rails in Khatauli near here this evening, officials said.
Khatauli is around 40 km from Muzaffarnagar. PAC, ATS and NDRF teams have been rushed to the spot. Heavyweight cranes and gas cutters were being used and locals were seen helping out those engaged in rescue work
Muzaffarnagar authorities have set up a control room to assist families of those affected.
The numbers are: 0131—2436918, 0131—2436103 and 0131— 2436564.
Prime Minister Narendra Modi expressed extreme pain over the derailment and said the Railway Ministry and the state government were doing everything possible and providing all assistance required.
He said the situation was being monitored very closely by the Railways Ministry.
Railway Minister Suresh Prabhu ordered an inquiry into the derailment. He said he was personally monitoring the situation and strict action will be taken in case of any lapse.
Prabhu also announced Rs. 3.5 lakh ex-gratia for those who lost their lives, Rs. 50,000 for the seriously injured and Rs. 25,000 for those who received minor injuries.
In a series of tweets, Prabhu said that Minister of State Manoj Sinha has rushed to the spot while the Chairman of Railway Board and Member Traffic have been asked to oversee rescue and relief operations.
Two National Disaster Response Force (NDRF) teams, comprising 45 personnel each, and two canines have been mobilised to the accident site from their base in Ghaziabad.
Medical vans have also been rushed to the site.
“All efforts being taken to ensure speedy relief and rescue operations,” Prabhu said.
The Railway Ministry was also in close touch with the Uttar Pradesh government to coordinate rescue and relief operations.
In Lucknow, Uttar Pradesh ADG (Law and Order) Anand Kumar said that top priority was being accorded to ensure prompt rescue and relief work.
Meanwhile, Saxena said, “Initially, we thought that it was only 4-5 coaches, now we have ascertained that 14 coaches have derailed. As of now our focus is on rescue and not on finding reasons for the accident.”
Since darkness was impeding rescue operations, he said the power department officials had been directed to ensure that there was no shortage of electricity.
Kumar also said IMA chapters in Meerut zone have been alerted and asked to ensure adequate and prompt medical care to the injured.
Uttar Pradesh Chief Minister Yogi Adityanath enquired about the accident and directed officials to take all possible action, an official spokesperson said.
Adityanath has directed two of his ministers to reach the site to expedite rescue and relief operations.
मजहब की टूटी दीवारें, संत बोले- मुस्लिम युवक न आते तो बचना था मुश्क‍िल
मुजफ्फरनगर: खतौली रेलवे स्टेशन के पास शनिवार को पुरी-हरिद्वार एक्सप्रेस (उत्कल एक्सप्रेस) के 12 ड‍िब्बे पटरी से उतर गए।
मेरठ.यूपी के मुजफ्फरनगर में खतौली रेलवे स्टेशन के पास जहां उत्कल एक्सप्रेस हादसा हुआ, उसके एक ओर अहमद नगर नाम की नई आबादी है। ये मुस्लिम बस्ती है, जबकि रेलवे पटरी के दूसरी तरफ ‘जगत’ नाम की कॉलोनी और तहसील है। ये इलाका हिंदू बाहुल्य क्षेत्र है। रेल हादसे के बाद यहां धर्म और मजहब की सभी दीवारें टूट गईं। मुस्लिम और हिंदू युवकों ने मिलकर ट्रेन में फंसे घायलों को निकालकर अस्पताल पहुंचाने का काम शुरू किया। घायल संतों का कहना है- अगर मुस्ल‍िम युवक समय पर न आते तो बचना मुश्क‍िल था। बता दें, शनिवार को हुए इस हादसे में 23 लोगों की मौत हुई है और 156 से ज्यादा लोग घायल हैं।
40 से अधिक घायलों को निकाला बाहर
– अहमद नगर के मोहम्मद रिजवान और अनीस ने बताया, जिस समय ये हादसा हुआ वो अपने घर के बाहर खड़े थे। आवाज सुनकर वो भी घबरा गए कि आखिर हुआ क्या? लेकिन जैसे ही रेलवे ट्रैक की ओर देखा तो होश उड़ गए। ट्रेन पटल गई थी और वहां धुएं के गुब्बारे उड़ रहे थे।
– ट्रेन के डिब्बे से चीखों की आवाज आ रही थी। सब लोग दौड़ पड़े और घायलों को बाहर निकालने का काम शुरू कर दिया गया। रिजवान कहते हैं कि एक ही डिब्बे से 40 से अधिक घायलों को बाहर निकाला, 5-6 ऐसे थे जिनकी मौत हो चुकी थी।
– इरशाद ने बताया, लोग घायलों की मदद के लिए अपने घरों से चारपाई आदि लेकर पहुंच गए। जब तक एंबुलेंस नहीं आई, तब तक घायलों को चारपाई आदि पर लिटाया गया। जिससे जैसी मदद हो रही थी, वो कर रहा था।
– पूरा मोहल्ला अपने घरों से निकलकर घायलों की मदद कर रहा था। खतौली के मिस्त्री-मैकेनिक भी वहां पहुंच गए। उन्होंने अपने औजारों की मदद से डिब्बे काटकर उसमें फंसे लोगों को निकालने का काम शुरू कर दिया।
आसपास के गांव से भी लोग दौड़े
– ट्रेन पलटने की सूचना पूरे इलाके में आग की तरह फैल गई। आसपास के गांव के लोग भी मौके पर पहुंच गए और राहत कार्य में हाथ बंटाने का काम शुरू की दिया।
– देवेंद्र ने बताया, कई घायलों की हालत बेहद चिंता जनक थी। सभी घायलों को एंबुलेंस से अस्पताल भिजवाया जा रहा था। गांव से आए लोगों ने भी घायलों को बाहर निकलवाकर अस्पताल पहुंचाने का काम शुरू किया।
फरिश्ते बनकर आए मुस्लिम युवक
– इस हादसे में घायल हुए संत हरिदास ने बताया, सब कुछ अचानक हुआ। तेज धमाके की आवाज के बाद डिब्बे एक-दूसरे के ऊपर चढ़ गए। चीख-पुकार मच गई। किसी को कुछ समझ नहीं आया कि आखिर हुआ क्या? कुछ होश आया तो डिब्बे पूरी तरह पलट चुके हैं। लोग जान बचाने के लिए चिल्ला रहे थे, ऐसे में पास की मुस्लिम बस्ती से कुछ युवक दौड़कर आए और एक-एक कर डिब्बे में फंसे यात्रियों को बाहर निकालने लगे।
– ट्रेन में यात्रा कर रहे संत मोनीदास के मुताबिक, यदि समय रहते मुस्लिम युवक उन्हें न बचाते, तो मरने वालों की संख्या और अधिक हो सकती थी। वो कहते हैं, अगर मुस्ल‍िम युवक न आते तो बचना मुश्क‍िल था।

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