This NGO woman is accused of Rs. 1000 crore scam in Nitish’s Bihar

scamPatna: The CBI has taken over the probe into the Srijan scam in Bihar, in which government funds worth about Rs. 1,000 crore were allegedly diverted to the accounts of a non-government organisation.
The central probe agency has registered 10 FIRs in the case, which was being investigated by the Economic Offences Unit (EOU) of the Bihar Police.
The CBI took over the investigation after the Bihar government referred the case to it.
According to the norms, the agency re-registers the FIRs of the state police but is free to come out with its conclusion which is summed up in its final report–a charge sheet or a closure report.
The FIRs have been registered against Manorama Devi, Director of Srijan Mahila Vikash Samilti (the NGO), other officials of the organisation and bank officials, sources said.
They said the agency has received the reference from the Centre to take over the investigation and necessary documents have been received from the Bihar government today.
The Bihar Police had issued a lookout notice against the secretary of ‘Srijan’, Priya Kumar and her husband for allegedly swindling over Rs. 950 crore of government money in Bhagalpur.
Priya Kumar is the daughter-in-law of Manorama Devi, the founder of the NGO.
Manorama Devi died early this year after which the NGO was being run by Priya Kumar and Amit Kumar, son of Manorama Devi, state government officials had said.
1000 करोड़ रु. के घोटाले की आरोपी है ये महिला, सास गली में घूम बेचती थी साड़ी
पटना (बिहार). बिहार के सृजन घोटाला में आरोपी मनोरमा देवी के ऑस्ट्रेलिया में रह रहे बड़े बेटे डॉक्टर प्रणव कुमार के बारे में भी खुलासा हुआ है कि उसे भी घोटाले की पूरी जानकारी थी। बता दें कि मनोरमा देवी की 13 फरवरी 2017 को मौत हो चुकी है जिसके बाद सृजन एनजीओ का पूरा काम छोटे बेटे अमित की पत्नी प्रिया कुमार देखती थी। बहू से लेकर दोनों बेटे हैं आरोपी…
– हजारों करोड़ रुपए के इस घोटाले में मनोरमा का बेटा अमित और बहू प्रिया कुमार ही नहीं, बल्कि ऑस्ट्रेलिया में रहने वाला उसका बड़ा बेटा डॉ. प्रणव कुमार भी शामिल था।
– मां मनोरमा के श्राद्ध कर्म पर जब वह भागलपुर आया तो सृजन के एसोसिएट्स के साथ बैठक कर सृजन के पैसों को भी ढूंढ़ने की कोशिश की थी। इसका खुलासा सृजन के ऑडिटर सतीश कुमार झा ने अपने बयान में किया।
एक सिलाई मशीन से मनोरमा ने शुरू किया था बिजनेस
– एक सिलाई मशीन से बिजनेस शुरू करने वाली मनोरमा देवी, महिला सहकारिता के क्षेत्र में भागलपुर में बेंचमार्क मानी जाती थीं।
– 1000 करोड़ की मालकिन मनोरमा देवी आज लीजेंड स्टोरी ऑफ अनलिमिटेड करप्शन बन गईं।
– तब के बाद से अब तक सृजन संभल नहीं पाया। जांच में घोटाले की रकम रोज बढ़ती ही जा रही है।
ये है मनोरमा का फैमिली बैकग्राउंड
– पति अवधेश कुमार की 1991 में मौत के बाद मनोरमा देवी छह बच्चों की देखभाल के लिए सबौर आईं थीं।
– अवधेश कुमार रांची स्थित अनुसंधान संस्थान में प्रधान वैज्ञानिक थे।
– रांची में ही उन्होंने 1993-94 में सृजन महिला विकास सहयोग समिति की स्थापना की थी।
– उसमें देवर ने सहयोग किया था। बाद में देवर को भी समिति से अलग कर दिया।
– 1996 में सबौर में ही मनोरमा देवी ने एक कमरा किराये पर लेकर कपड़े सिलना व बेचना शुरू किया।
– पैसे की कमी आड़े आई तो रजन्दीपुर पैक्स ने 10 हजार रुपये उन्हें उधार दिये।
– समिति से महिलाओं को जुड़ता देख भागलपुर को-ऑपरेटिव बैंक ने सृजन को 40 हजार रुपये कर्ज दिया।
– उसके बाद सिल्क साड़ी, सजावटी सामान आदि का निर्माण होने लगा। ग्रामीण विकास विभाग ने सृजन को ग्रेड-1 का प्रमाण पत्र दिया।
– केंद्रीय वित्त मंत्रालय और बिहार के सहकारिता विभाग ने संस्था को सम्मानित किया।
– स्वयं सहायता समूह (एसएचजी) के गठन के लिए जब राज्य सरकार ने जीविका का गठन किया तब सृजन को माइक्रो फाइनेंस से लेकर तमाम तरह का जिम्मा मिला।
– सरकारी मदद के लिए कई खाते बैंकों में भी खोले गए और उसी के बाद सृजन की सरकारी धन में सेंधमारी शुरू हो गयी।
2003 के बाद सरकारी रकम ट्रांसफर का हुआ खेल शुरू
– सृजन घोटाले में जितने भी मामले प्रकाश में आए हैं, सब 2000 के बाद के हैं। यानी 2003 से लेकर अब तक संस्था ने जमकर सरकारी राशि का दुरुपयोग किया।
– भीखनपुर स्थित जिस प्रिंटिंग प्रेस में फर्जी पासबुक व स्टेटमेंट तैयार होता था। उसे मनोरमा देवी के ही प्रमुख फाइनेंशियल सलाहकार ने खुलवाया था। स्कूटर पर चलने वाला सलाहकार भीखनपुर में अरबों का स्वामी है।

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