Jinnah sold this bungalow to Dalmia who got it washed with Gangajal

JinnahIt may be recalled Jinnah started visiting Delhi after 1940 when Muslim League demanded a separate State for Muslims. Before he purchased this house, he used to stay either at Hotel Maidens or Imperial Hotel.
Initially, it is said, that he wasn’t very keen on having a residence in Delhi. Finally, relentless persuasion by some of his close Muslim League colleagues, including Liaquat Ali Khan, convinced Jinnah to go in for a house.
Old timers of Delhi said he rejected several houses on Alipur Road and Flag Staff Road before he settled for 10, Aurangzeb Road. Currently, it accommodates the Dutch embassy. During his stay in Delhi, Altaf Hussain, the former editor of The Dawn and the organiser of the Muslim League, used to stay with him. The Dawn, during those days, used to be published from Darya Ganj.
Jinnah, a scion of a Shite Khoja Muslim family, threw lavish parties whenever he was in Delhi. It is said that the house warming party of his 10 Aurangzed Road’s house in 1942 was held on such a lavish scale that it was long remembered by those who attended it. Among others, Ramkrishan Dalmia and Sir Shobha Singh attended that party.
According to well-known Hindi story writer and poet, Dinesh Nandni Dalmia — whose husband Ram Krishna Dalmia purchased 10, Aurangzeb Road house from Jinnah after the Partition of the country – Jinnah’s drawing room had photos of his wife Rutti, though they hadn’t lived together for very long. Rutti died in 1929. It is said that many rich people of Delhi were keen to purchase Jinnah’s house. Dalmia says her husband, though a secular man, had the house washed down with Gangajal before occupying it. Dalmia also removed the green and white banner of the Muslim League and put a flag of the Anti-Cow Slaughter movement. Larry Collins and Dominique Lapierre also mentioned this incident in their famous book, “Freedom at Midnight”.
ढाई लाख में जिन्ना ने बेचा था ये बंगला, खरीदने वाले ने गंगाजल से था धुलवाया
नई दिल्ली. पाकिस्ताान के फाउंडर और कायदे आजम मोहम्म्द अली जिन्ना का मुंबई में एक बंगला चर्चाओं में रहा है, लेकिन उनका एक बंगला दिल्ली में भी था। इस बंगले काे उनके ही एक भारतीय दोस्त और कारोबारी ने खरीदा था। बताया जाता है कि उस दोस्त ने बंगले को खरीदने के बाद गंगाजल से धुलवाया था। 11 सितंबर को जिन्ना की डेथ एनिवर्सिरी है। DainikBhaskar.com बता रहा है, उनके इस बंगले के बारे में। ढाई लाख में बेचा था बंगला, आज कीमत करोड़ों रुपए…
– मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, जिन्ना ने 1939 में दिल्ली में अपना एक ठिकाना बनाने का फैसला कर लिया।
– काफी तलाश के बाद 10 औरंगजेब रोड (अब एपीजे अब्दुल कलाम रोड) एक का बंगला खरीदा गया। इस बंगले काे एडवर्ड लुटियन की टीम के मैंबर और कनॉट प्लेस के डिजाइनर रॉबर्ट टोर रसेल ने डिजाइन किया था।
– करीब डेढ़ एकड़ में बने इस बंगल में दो मंजिले हैं। जिसमें 5 बेडरूम, एक बड़ा ड्राइंग रूम, मीटिंग रूम और बार हैं। आज इसकी कीमत करोड़ों रुपए है।
– पाकिस्तान जाने से पहले जिन्ना ने अपना बंगला करीब ढाई लाख रुपए में डालमिया को बेचा था। डालमिया ने बंगले को खरीदने के बाद गंगाजल से धुलवाया था।
– 1964 तक डालमिया ने इसे अपने पास रखा और फिर नीदरलैंड सरकार को बेच दिया और तबसे इसका इस्तेमाल नीदरलैंड के नई दिल्ली में एम्बेसेडर के रेसिडेंस के तौर पर किया जा रहा है।
बहन फातिमा के साथ जिन्ना पहुंचे थे खाने पर
– बता दें दिल्ली में जिन्ना के नॉन पॉलिटिशियन फ्रेंड्स की फेहरिस्त में खुशवंत सिंह के पिता सरदार सोभा सिंह और सेठ रामकृष्ण डालमिया शामिल थे।
– डालमिया की बेटी और राइटर नीलिमा डालमिया ने अपनी किताब ‘द सीक्रेट डायरी ऑफ़ कस्तूरबा’ में लिखा है कि “जिन्ना मेरे पिता सेठ रामकृष्ण डालमिया के साथ महज पैसे और इनवेस्टमेंट की बातें करते थे। वे पैसे के पीर थे। हमेशा के लिए दिल्ली छोड़ने से एक दिन पहले डालमिया के सिकंदरा रोड वाले बंगले पर जिन्ना को खाने पर बुलाया गया। इस दौरान उनकी बहन फातिमा जिन्ना भी साथ थीं।”

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