India’s first woman WWE wrestler, fights wearing shalwar-qameez

kavita dalalIndian woman pro-wrestler Kavita Dalal aka ‘Hard KD’ has participated in World Wrestling Entertainment’s (WWE) 32-competitior Women’s tournament, The Mae Young Classic.
Kavita, a former weightlifter, is student of former WWE heavyweight champion Dalip Singh Rana Singh aka ‘The Great Khali’ and trains in Khali owned Jalandhar-based wrestling promotion Continental Wrestling Entertainment (CWE). Kavita shot to fame after her video, in which she wrestled in ‘Salwar Kameez’ in CWE against a woman wrestler named B B Bull Bull, went viral on social media.
Kavita participated in the WWE Dubai tryout earlier this year in April where she gained the attention of talent scouts with her strong performance. Now, Kavita will be making history as the first Indian woman ever to appear in WWE . Kavita will be competing with 31 other top female competitors from around the world in the first-ever Mae Young Classic.
“I am honoured to be the first Indian woman to compete in WWE’s first ever women’s tournament. I hope to use this platform to inspire other Indian women with my performance and make India proud” said Kavita.
Kavita was constable in Sashastra Seema Bal before she decided to make the switch to pro-wrestling. Kavita has represented India in various national and international tournaments.
The tournament comes on the heels of other successful WWE Network tournaments, such as last year’s Cruiserweight Classic, which focused on competitors 205 pounds and lighter, and January’s United Kingdom Championship Tournament, which spotlighted the U.K.’s toughest grapplers.
“Kavita gave a strong performance at WWE’s 2017 Dubai tryout. She is an athletic and extremely strong woman who demonstrated a solid grasp of the fundamentals of sports entertainment, and a passion to improve that will serve her well in WWE’s upcoming Mae Young Classic tournament,” said Canyon Ceman, Vice President, WWE Talent Development.
रोज 3 लीटर दूध, महीने में 6Kg घी, सलवार-कमीज पहन लड़ती है ये रेसलर
जींद(हरियाणा). विदेशी महिला पहलवानों को उठा-उठाकर पटकने वाली हरियाणा की कविता दलाल डब्ल्यूडब्ल्यूई के रिंग में उतरी देश की पहली महिला पहलवान हैं। वेटलिफ्टिंग की इस पूर्व खिलाड़ी की खास बात है कि रिंग में वे सलवार-कमीज पहनकर उतरती हैं। कहती हैं कि वेटलिफ्टिंग में ड्रेस कोड होता है। इस वजह से सलवार कमीज पहनकर कभी उसमें हिस्सा नहीं ले पाई। अगर सलवार-कमीज पहनकर फाइट से कोई रोकता तो रेसलिंग छोड़ देती। यह हमारे देश की संस्कृति को विदेशों में बढ़ावा देने का मेरा तरीका है। हालांकि कविता के रोजमर्रा के पहनावे में जींस, पेंट और शर्ट-टीशर्ट शामिल हैं। रेसलिंग में वे नाटकीय तरीके से आईं…
– बात 13 जून 2016 की है। वे जालंधर में 4 साल के बेटे के साथ खली की अकेडमी में रेसलिंग शो को देखने गई थीं।
– फाइट में दिल्ली की महिला रेसलर बुलबुल ने एक महिला को हराकर लड़कों व लड़कियों को चुनौती दे डाली कि कोई है जो उससे मुकाबला कर सके।
– इस पर कविता का खून खौला तो वे सलवार कमीज में ही ऑडियंस में से उठकर रिंग में पहुंच गईं। बुलबुल की चुनौती को स्वीकारा और उसे हरा दिया।
– इसके दो दिन बाद ही जब वे दर्शकों में बैठी थीं तो पीछे से बुलबुल ने उन पर हमला कर दिया। इसमें उन्हें चोट आई।
#डब्ल्यूडब्ल्यूई रेसलर
– इसी दिन उन्होंने मन बना लिया कि अब वेटलिफ्टिंग छोड़कर रेगुलर प्रैक्टिस कर डब्ल्यूडब्ल्यूई रेसलर बनेंगी।
– जालंधर में ही खूब प्रैक्टिस की और एक शो में अमेरिका की रेसलर नटरिया, जिमी जेम व एटीना को शिकस्त दे डाली।
– तीन माह बाद ही अक्टूबर 2016 में हरियाणा के पानीपत में ओपन इंटरनेशनल रेसलिंग चैम्पियनशिप में अमेरिका की दो और कनाडा की एक रेसलर को चित कर दिया।
#खेत के कामकाज में हाथ बंटाती थी
– कविता बचपन से ही ताकतवर हैं। उनके भाई संजय दलाल बताते हैं कि वह घर व खेत के कामकाज में पूरा हाथ बंटाती थी।
– 13-14 साल की उम्र में जब वह खेत में मां के साथ जाती तो 40-50 किलो की चारे की गठरी अकेले ही उठा लेती थी। जबकि इस उम्र के दो-तीन लड़के मिलकर ऐसी गठरी उठा पाते थे।
– खेल प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेने का उसका शुरू से ही रुझान था। 2002 में जींद जाट कॉलेज में बीए प्रथम वर्ष में उन्होंने इंटर कॉलेज गेम के लिए शॉटपुट में ट्रायल दिया।
– कविता ने सबसे ज्यादा (लड़कों से भी आगे) गोला फैंककर सबको चकित कर दिया था। बाद में कर्णम मल्लेश्वरी को अपना आदर्श मानते हुए फरीदाबाद में उन्होंने वेटलिफ्टिंग की ट्रेनिंग शुरू की।
– 12 वर्ष तक वेटलिफ्टंग में ही देश के लिए राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई मेडल जीते।
#शुद्ध शाकाहारी हैं, सुबह की शुरुआत योग से
– कविता बताती हैं कि उन्होंने कभी भी मीट नहीं खाया है। हमेशा ही शाकाहार फेवरेट रहा। देशी घी से बना हलवा, चूरमा, खीर, दूध लेती हैं।
– फाइट शुरू होने से एक-डेढ़ घंटे पहले उबले आलू, चना, चावल लेती हैं। कभी-कभी सप्लीमेंट लेती हैं। सुबह नाश्ते में दूध के साथ दलिया खाती हैं। रिंग में प्रैक्टिस से पहले फ्रूट, ड्राईफ्रूट या प्रोटीन लेती हैं।
– लंच में दाल, सब्जी, चावल, रोटी, सलाद होता है। शाम को जिम जाने से पहले दूध, केले आदि लेकर एक-डेढ़ घंटे खूब पसीना बहाती हैं। शाम को भोजन में हलवा, खीर, चूरमा और रोटी-सब्जी खाती हैं।
– इसके बाद ठंडा दूध पीती हैं। दिन में 3 लीटर दूध पीती हैं। महीने भर में 6 किलो घी लगता है और रोज करीब 50 ग्राम काजू-बादाम खाती हैं।
– उनकी डाइट का एक किस्सा 2008 का है। वे लखनऊ में वेटलिफ्टिंग ट्रेनिंग कैम्प में थीं। साथियों से शर्त लग गई कि कौन ज्यादा खाता है। वे 32 रोटियां खा गईं। जबकि साथी तो 16-17 के आगे बढ़ नहीं सकी।

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