Brother – sister pay price of Scooty in coins of Rs. 62,000

coinsJaipur: 13 years old Yash and her elder sister Rupal reached a showroom to buy a Scooty. they carried the money only in coins. Manager refused to sell the vehicle against coins. However, the emotional side of the story forced him to sell. It was revealed that brother-sister were children of a middle income father who used to give them pocket money only in coins, which they were collecting since long. Entire staff of the showroom was engaged in counting the coins.
बैगों में सिक्के लेकर गाड़ी खरीदने पहुंचे भाई-बहन, स्टोरी में था ऐसा इमोशन
बहन रूपल के साथ गाड़ी के शो रूम पहुंचा 11 साल का यश।
जयपुर. यहां दिवाली के दिन एक स्कूटर कंपनी का शोरूम बंद होने ही वाला था कि 13 साल का एक बच्चा अपनी बहन के साथ दाखिल हुआ। दोनों के हाथों में बैग थे। 62 हजार रुपए के सिक्के लेकर यश बड़ी बहन रूपल के लिए स्कूटर खरीदने आया था। इतने सिक्के देखकर शोरूम कर्मचारी हैरान रह गए। एक बार तो स्कूटर देने से मना भी कर दिया। लेकिन जब यश ने पूरी कहानी सुनाई तो शोरूम मैनेजर को राजी होना पड़ा। भाई- बहन ने सुनाई ये कहानी…
– आठवीं में पढ़ने वाला यश और उसकी बहन रूपल दो सालों से पॉकेट मनी जमा कर रहे थे। यश के पिता की आटा चक्की है। दोनों को पाॅकेट मनी सिक्कों में ही मिलती थी। जब नोट भी मिलते तो वे इस डर से सिक्कों में बदलवा लेते कि कहीं खर्च ना हो जाएं। जब 62 हजार रुपए जमा हो गए तो दोनों स्कूटर लेने पहुंच गए। माता-पिता को सरप्राइज देना चाहते थे, इसलिए उन्हें बताया नहीं। हालांकि मामा को जरूर साथ लाए थे।
पूरेे स्टाफ ने बैठकर ढाई घंटे में गिने पैसे
होंडा एडवेंट के जनरल मैनेजर ने बताया कि यह हमारे लिए पहला ऐसा मामला था, जब कोई पूरा पैसा सिक्कों के रूप में लेकर स्कूटर खरीदने आया। यह मामला इमोशनल था, इसलिए हमने एक्स्ट्रा टाइम लेकर यश और उसकी बहन के लिए शोरूम खोले रखा। पूरे स्टाफ ने बैठकर दो-ढाई घंटों में सिक्कों को गिना।

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