5 killed as 5 storey building collapses after explosion

accidentAt least three people were killed and more than 15 remain trapped in the debris after a three-storeyed factory, which manufactures polybags, caught fire and collapsed in Ludhiana’s Industrial Area on Monday. Two of the deceased have been identified as fireman Puran Singh and taxi service owner Inderpal Singh.
The building of Amarson Polymers, at Suffiana Chowk, collapsed around noon, four hours after the fire broke out. A team of NDRF personnel are conducting rescue operations, while the Border Security Force (BSF) and the Punjab Armed Police (PAP) have also been rushed from Jalandhar.
“Three bodies have been pulled out, out of which two have been identified,” PTI quoted Ludhiana’s Police Commissioner R N Dhoke as saying.
Rescue operations underway after Amarson Polymers building collapsed in Ludhiana on Monday (Express Photo/Divya Goyal)
Among the 15 people trapped in the debris are eight employees of the fire department and three officials – Rajinder Sharma, Raj Kumar and Sumohan Gill. The Punjab Health Minister has rushed to the spot, reports said.
5 मंजिला फैक्टरी में हुए धमाके, मलबे में ऐसे दब गईं लाशें और जिंदा लोग
लुधियाना.सोमवार सुबह पौने 7 बजे सूफिया चौक के निकट जनकपुरी इलाके में स्थित फ्लेक्स व प्लास्टिक का सामान बनाने वाली फैक्टरी की 5 मंजिला इमारत में आग लग गई। मौके पर पहुंची फायर ब्रिगेड की 25 गाड़ियों ने 10.30 बजे तक आग पर काबू पा लिया लेकिन 11 बजे इमारत में रखे केमिकल ड्रम में पहला विस्फोट हुआ और आग फिर से भड़क गई। बचाव कार्य फिर शुरू हो गया। मलबे में दब गए 32 लोग, 4 निकाली गई लाशें..

11:15 बजे दूसरा विस्फोट हुआ। जब दोपहर 12.30 बजे तीसरा विस्फोट हुआ तो 5 मंजिला इमारत भरभरा के गिर गई। विस्फोट से साथ लगती 2 अन्य फैक्टिरियां भी ढई गईं। इमारत गिरने से 9 फायर मुलाजिम, 7 फैक्टरी वर्कर व बचाव कार्य में लगे 30 से 32 लोग मलबे में दब गए। रात तक 4 लाशें निकाली जा चुकी थीं। 3 गंभीर हैं। रोहित नाम के युवक को जिंदा निकाला गया। 7 घर भी क्षतिग्रस्त हो गए हैं। बताया जा रहा है कि अाग शॉर्ट सर्किट से लगी है। मरने वालों में फायर अफसर शमूअन गिल, टैक्सी सर्विस के मालिक इंदरपाल, एक फायर मैन व एक अन्य हैं। जख्मी युवक की पहचान रोहित, विक्की व तीसरे की पहचान नहीं हो सकी है।
दो बड़ी लापरवाही
1 इमारत 2 मंजिला से 5 मंजिला कैसे हो गई निगम को अभी तक पता ही नहीं
बिल्डिंग को इंद्रजीत सिंह गोला ने साल 2002-03 में खरीदा था। तब ये बिल्डिंग 2 मंजिला ही थी। 3 अन्य मंजिलों के लिए निगम से काेई मंजूरी ली गई या नहीं, इसका कोई रिकॉर्ड नहीं मिल पाया है। निगम कमिश्नर जसकिरन सिंह ने रिकॉर्ड मंगवाया है। अफसर इमारत काे पुरानी बता रहे हैं। वहीं, एटीपी हरविंदर सिंह ने बताया कि बिल्डिंग 15 साल पुरानी है, रिकॉर्ड नहीं मिल पाया है।
2 मशीन खराब हो गई, जानकारी नहीं दी थी
अाग शॉर्ट सर्किट से आग लगी है। बताया जा रहा है कि रविवार रात को स्पार्किंग होने के कारण एक मशीन खराब हो गई थी, जिसे बंद तो कर दिया गया लेकिन किसी को बताया ही नहीं। सोमवार जब कर्मचारी ने मशीन को चालू किया तो शॉर्ट सर्किट हो गया।
दो घंटे बाद निकला जिंदा…
बगल की फैक्टरी में आग की सूचना के बाद जनता रिक्शा फैक्टरी के मालिक रोहित कपूर अपनी फैक्टरी से सामान निकालने लगे। इसी बीच एक ही झटके में उनकी फैक्टरी भी ढह गई। करीब 2 घंटे तक वह दबे रहे। फिर उन्हें जिंदा निकाल लिया गया। दोनों टांगें फ्रैक्चर हैं। सिर और माथे समेत कई जगह चोटें आई हैं। अस्पताल में भर्ती हैं।
एक दफा आग पर काबू पा लिया था पर कैमिकल ड्रमों में धमाके से फिर भड़की
प्रत्यक्षदर्शियों की माने तो सोमवार सुबह 7 बजे लगी आग पर एक दफा करीब 10.30 बजे काबू पा लिया गया था लेकिन मशीन में धमाका होने से आग फिर भड़क उठी। इसके बाद फिर एक धमाका हुआ। बचाव कार्य में लगे फैक्टरी के प्रोडक्शन मैनेजर गुरदीप सिंह ने बताया, ऊपरी मंजिल पर लगी आग ग्राउंड फ्लोर पर पहुंच चुकी थी। आग जैसे ही एक कमरे में रखे केमिकल स्याही वाले ड्रमों तक पहुंची तो फिर धमाका हुआ। इसके बाद बिल्डिंग ही गिर गई। आग की लपटें गली तक आईं। बाहर खड़े लोगों ने भागकर जान बचाई।
बिल्डिंग गिरने लगी तो नीचे की ओर भागे लोग
मलबे से जिंदा बाहर निकाले गए विक्की ने बताया, जब फैक्टरी में आग लगी तो वह भी बचाव में जुटा। एक बार अाग बुझ गई तो राहत महसूस हुई। मगर धुएं से काफी परेशानी हो रही थी। इसके बाद हम लोग पहली मंजिल पर बचाव कार्य के लिए पहुंच गए। ऑफिस में सामान निकालने लगे तो जोरदार धमाका हुआ। इसके बाद बिल्डिंग गिरने लगी तो सभी नीचे की तरफ भागे। ऊपर से सामान गिरने से वह सीढ़ियों से लुढ़क गया। उसकी टांगें मलबे में दब गईं थीं। इसके बाद उसके सिर पर लकड़ी का बॉक्स आकर गिरा तो आंखों के सामने अंधेरा छा गया। इसके बाद मुझे नहीं पता, क्या हुआ।
फैक्टरी मालिक की तबीयत बिगड़ी…
हादसे के कारण फैक्टरी मालिक की तबीयत बिगड़ गई। जिसे अस्पताल में भर्ती करवाया गया। देर शाम तक फायर ब्रिगेड की 100 से अधिक गाड़ियां बचाव कार्य में लगी हुई थी। पुलिस कमिश्नर समेत 100 से अधिक पुलिस कर्मी, 50 मिलिट्री जवान, 20 एनडीआरएफ, 16 एसडीएफ, रेसक्यू टीम, 60 फायर कर्मी व नगर निगम का स्टाफ बचाव कार्य में जुटा हुआ था।

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