Bed-ridden for 10 years, this lady principal runs school through tab

bed riddenSaharanpur: The lower-half of Uma Sharma’s body is paralysed. Yet, this 64-year-old has not lost any hope. She is the principal of National Public School and has been instructing authorities from her bed.
From the past ten years, she has been using tablet and mobile phone to teach students. She also takes virtual classes.
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ANI UP

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Saharanpur: Despite lower-half of her body being paralysed, 64-year-old Uma Sharma, principal of National Public School, has been instructing authorities from her bed with the help of tablet & mobile phone for the last 10 years. She also takes virtual classes

3:16 PM – Dec 29, 2017
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Uma Sharma has faced a lot of tragedies in her life. Her husband passed away 27 years ago. Soon after, both her son and her daughter died in a road accident.

However, she did not let these tragedies affect her morale and took to teaching students.
10 साल से बिस्तर पर है ये प्रिंसिपल, टैब की मदद से ऐसे चलाती हैं स्कूल
सहारनपुर. यहां की उमा शर्मा पिछले 10 साल से बिस्तर पर हैं। उनके शरीर का निचला हिस्सा पूरी तरह लकवे का शिकार है। सिर्फ हाथ और चेहरा इस बीमारी से बचा है। बिस्तर पर होने के बावजूद उमा पिछले 10 साल से एक स्कूल चला रही हैं और प्रिंसिपल का पूरा काम संभालती हैं।

10 साल से बिस्तर पर लेटे-लेटे ऐसे चला रहीं स्कूल

– यूपी के सहारनपुर जिले की रहने वाली उमा शर्मा करीब 64 साल की हैं। एक दिन अचानक उनके शरीर पर लकवे का असर आया और उन्होंने बिस्तर पकड़ लिया। काफी इलाज के बावजूद आराम नहीं हुआ।
– उनके सिर्फ हाथ और चेहरे पर लकवे का असर नहीं है, जिस कारण वह ठीक से बोल लेती हैं।

– ये मंगल नगर स्थित नेशनल पब्लिक स्कूल की प्रिंसिपल हैं और नुमाइश कैंप स्थित अपने घर में अकेली रहती हैं। उनका स्कूल घर से करीब 5 किमी दूर है। पति अशोक शर्मा का करीब 27 साल पहले अचानक देहांत हो गया था। 3 बेटियों और एक बेटे को उन्होंने पाला।

– 4 साल तक गंगोह कस्बे में इन्होंने अपना एक स्कूल चलाया। तीनों बेटियों की शादी की, लेकिन एक बेटे और एक बेटी की असामयिक मृत्यु हो गई।
– खुद को बिजी रखने के लिए इन्हें शैक्षिक सेवाएं ही बेहतर विकल्प नजर आया। इसलिए अपना स्कूल बंद कर शहर में आकर पब्लिक स्कूल में नौकरी कर ली।

– वह कहती हैं, जब मुझे पता चला कि अब मैं कभी बिस्तर से नहीं उठ पाऊंगी तो मैंने लेटे-लेटे कुछ करने की ठानी। घर पर ही बच्चों को वर्चुअल क्लास देनी शुरू की। टैब की मदद से स्कूल की सभी क्लास और स्टाफ रूम पर नजर रखती हूं।

– स्कूल के प्रबंधक सुरेंद्र चौहान कहते हैं, मुझे उमा के स्कूल में उपस्थित न होने का कभी एहसास ही नहीं हुआ। उनकी वर्चुअल उपस्थिति और सक्रियता किसी शारीरिक उपस्थित व्यक्ति से कहीं ज्यादा हैै।
– उन्होंने ऐसे बच्चों को तलाशा जिनके भीतर ऐसी भावना पैदा हो गई थी कि वे पढ़-लिख नहीं सकेंगे। ऐसे बच्चों को उन्होंने मानसिक रूप से मजबूत किया और उनके अंदर पढ़ने का जज्बा पैदा किया।

– बीमारी के बावजूद वह अपने ज्ञान से ऐसे बच्चों को CBSE और ICSE बोर्ड के टॉपर बनाने की कोश‍िश कर रही हैं।

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