Police searches residence of accused IAS officer Deepak Anand

ias-cmBihar: On Wednesday, Special Vigilance Unit conducted raids at different locations related to Deepak Anand, former District Magistrate of Bihar’s Chapra district. Raids were conducted in Patna, Sitamadi, Katihar and Jharkhand’s Godda. IAS Anand has been accused of indulging in corruption while in office for ten years.
Raids were also conducted at his relative Krishna Nand Bhagat’s house. The unit has also registered a case of corruption against his wife Dr. Shikha Rani, who is pursuing Post Graduation from Katihar Medical College.
During the raids, police seized the total property of more than 1 crore.
This is the third case in the state when an IAS officer has been accused of corruption and possessing black money. Earlier in 2011, a similar case was lodged against IAS SS Verma.
eepak Anand has served as district magistrate of Bihar’s Chapra and Samastipur district.
On one hand, when Bihar’s Chief Minister Nitish Kumar claims an effective law and order in the state, such raids put up questions over the administration.
जब इस IAS की पत्नी के कमरे में पहुंची विजिलेंस की टीम, घंटों तक चली छानबीन
कटिहार/पटना. छपरा के डीएम रहे आईएएस दीपक आनंद के पत्नी डॉक्टर शिखा रानी के कटिहार मेडिकल कॉलेज स्थित हॉस्टल के कमरे की गुरुवार को दोबारा जांच की गई। बुधवार को भी टीम ने कमरे को सील किया था। सूत्रों की मानें तो जांच टीम जरूरी दस्तावेज और अन्य आवश्यक सामान को जब्त कर अपने साथ पटना लेकर चले गई। विजिलेंस की छापेमारी को लेकर कॉलेज परिसर में हड़कंप का माहौल है।
– बता दें कि आईएएस की पत्नी डॉक्टर शिखा रानी कटिहार मेडिकल कॉलेज के रेडियोलॉजी विभाग में पीजी की छात्रा हैं।
– पहले वे यहां पर सरकारी क्वार्टर में रहती थीं। विधिवत कटिहार के पूर्व जिलाधिकारी ने उन्हें ऑफिसर क्वार्टर में आवास मुहैया कराया था।
– जानकारी के अनुसार, मामला डॉक्टर शिखा रानी के पति पूर्व डीएम दीपक आनंद पर बालू माफिया को सरंक्षण देने का आरोप है।
– सीतामढ़ी के मूल निवासी दीपक आनंद 2007 बैच के आईएएस हैं। पहली पोस्टिंग में बेतिया में एसडीओ थे।
– इसके बाद वे समस्तीपुर के डीडीसी, बांका व सारण के डीएम के अलावा पंचायती राज निदेशक रहे। अभी उन्हें वेटिंग फॉर पोस्टिंग में रखा गया है।

20 बिन्दुओं पर चल रही जांच
– सारण के इतिहास में पहले डीएम दीपक आनंद रहे जिन पर भ्रष्टाचार का आरोप लगा। यही नहीं, भ्रष्टाचार में संलिप्त रहने के कारण उन्हें डीएम के पद से हाथ धोना पड़ा था। अब तो उन पर लगे भ्रष्टाचार के आरोपों को आर्थिक अपराध इकाई की कार्रवाई ने मुहर लगा दी है।

जांच में मिलीं गड़बड़ियां, दोषी
– छपरा के तत्कालीन डीएम दीपक पर कई गड़बड़ी करने का आरोप है, जिसकी जांच के लिए सरकार द्वारा सारण प्रमंडल के आयुक्त को भेजी गई। कुछ मामले में आयुक्त ने आदेश भी निकाले है जिसके आलोक में डीएम द्वारा पहल की गई है।
– बता दें कि डीएम पर करीब 20 मामले जांच के है।जिसमें एक-एक कर जांच की जा रही है। अब तक जिला प्रशासन ने तीन से चार मामले की जांच पूरी कर ली है।

जिसमें गड़बड़ियां पाई गई उसमें दीपक आनंद द्वारा निकाले गए आदेश नियम को ताक पर रख किया गया था। जिसके आलोक में जांच के बाद जिले के अस्पतालों में बहाल आउटसोर्सिंग कंपनियों को टेंडर रद्द भी कर दिया गया।
– वहीं, महाराजगंज के तत्कालीन सांसद के हथियार के रद्द किए गए लाइसेंस को भी बहाल कर दिया गया।
– यहां बता दें कि दीपक आनंद ने तबादले से कुछ दिन पहले उनके करीब एक दर्जन लाइसेंस रद्द कर दिए गए थे। इसके अन्य बिन्दुओं पर जिला प्रशासन जांच कर रही है।

SUV के निशाने पर कई अधिकारी
– जिले के कई अधिकारी और बालू माफियाओं पर आर्थिक अपराध इकाई की गाज गिर सकती है। आर्थिक अपराध इकाई की टीम जिले के कई अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई के लिए साक्ष्य जुटाने में लगी है और बालू माफियाओं कोई चिन्हित किया जा रहा है।
– दीपक आनंद पर आर्थिक अपराध इकाई ने बालू माफियाओं से सांठ गांठ रखने का खुलासा के बाद कार्रवाई की है। उनके विभिन्न ठिकानों पर छापेमारी में जो अभिलेख मिले हैं, उसके तार सारण के कई अधिकारियों से जुड़े हुए हैं और इसी के आधार पर कार्रवाई की तैयारी चल रही है।

– दीपक आनंद के कार्यकाल में तैनात खनन परिवहन विभाग से जुड़े अधिकारियों को आर्थिक अपराध इकाई ने टारगेट में ले लिया है।

अस्पताल के आउटसोर्सिंग एजेंसियों में भी गड़बड़ियां

– जिला स्वास्थ्य समिति के डीपीएम धीरज कुमार कई आरोपों से घिरे रहे हैं और डीपीएम पर प्रमंडलीय आयुक्त नर्वदेश्वर लाल ने भी डीपीएम के कार्यकलाप पर प्रश्न चिह्न लगाया है।

– आउट सोर्सिंग एजेंसियों के चयन में मनमानी करने अनियमितता बरतने के मामले में पटना हाईकोर्ट के आदेश पर प्रमंडलीय आयुक्त ने जांच के बाद ऑब्जरवेशन में डीपीएम के बारे यह टिप्पणी की थी।

– आयुक्त की जांच के बाद ही जिला स्वास्थ्य समिति के द्वारा आउट सोर्सिंग एजेंसियों के चयन की प्रक्रिया को रद्द कर दिया गया। इस मामले में अनियमितता बरतने वालों पर कार्रवाई के लिए डीएम हरिहर प्रसाद राज्य स्वास्थ्य समिति के कार्यपालक निदेशक को पत्र को लिख चुके हैं।

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